आदिवासी हितों की अनदेखी के खिलाफ आदिवासी संगठनों का बिगुल: 4 जून को झारखंड बंद का ऐलान, भारत आदिवासी पार्टी का समर्थन

Share करें

✓ Link copy हो गया!

जमशेदपुर, 1 जून 2025: आदिवासी धार्मिक स्थलों की रक्षा, सामाजिक अधिकारों की बहाली और जमीन से जुड़े मुद्दों पर सरकार की उदासीनता के खिलाफ “आदिवासी बचाओ मोर्चा” एवं विभिन्न आदिवासी संगठनों ने मिलकर एकजुट आंदोलन की राह चुनी है। इसी क्रम में 4 जून को झारखंड बंद का आह्वान किया गया है, जिसे भारत आदिवासी पार्टी ने अपना समर्थन दिया है।

केंद्रीय सरना स्थल के पास रैंप उद्घाटन बना विरोध का कारण

आदिवासी संगठनों के अनुसार, रांची स्थित केंद्रीय सरना स्थल सिरम टोली के पास बनाया गया रैंप आदिवासियों की धार्मिक आस्था पर सीधा आघात है। यह स्थान आदिवासियों की परंपरागत धार्मिक पहचान का प्रतीक है और वहां किसी भी प्रकार का संरचनात्मक हस्तक्षेप आदिवासी संस्कृति के विरुद्ध है। बावजूद इसके, राज्य सरकार की ओर से 4 जून को रैंप का उद्घाटन तय किया गया है, जिसके विरोध में झारखंड बंद बुलाया गया है।

धार्मिक स्थलों की रक्षा की उठी मांग

प्रदर्शनकारी संगठनों ने मरंग बुरू (पारसनाथ पहाड़), लुगु बुरू, मूढ़हार पहाड़, पिठोरिया देवड़ी दिरी और तमाड़ जैसे पारंपरिक आदिवासी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण की मांग को भी आंदोलन का अहम हिस्सा बताया। इन स्थलों को विकास या औद्योगिकीकरण के नाम पर नुकसान पहुंचाने की कोशिशों के खिलाफ ये संगठन लामबंद हो चुके हैं।

पेसा कानून और स्थानीय नीति लागू करने की मांग

आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट कहा है कि झारखंड में अब तक पेसा कानून की नियमावली नहीं बनाई गई है, जिससे ग्राम सभाएं अपने अधिकारों का प्रभावी इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं। इसके अलावा, स्थानीय नीति को भी स्पष्ट और प्रभावी रूप में लागू करने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

रैयती जमीन की लूट के खिलाफ मोर्चा

आदिवासी संगठनों ने राज्य में रैयती (स्वामित्वाधिकार वाली) जमीन के हस्तांतरण, अधिग्रहण और कब्जे की घटनाओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि कॉरपोरेट और बाहरी शक्तियों के दबाव में आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है, जिससे उनकी आजीविका, संस्कृति और अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है।

प्रेम शाही मुंडा ने किया बंद का समर्थन

भारत आदिवासी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम शाही मुंडा इन मुद्दों की गंभीरता को देखते हुए जमशेदपुर पहुंचे और यहां विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा:

“यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई है। राज्य सरकार अगर हमारी धार्मिक आस्थाओं, सामाजिक संरचनाओं और ज़मीन के अधिकारों की अनदेखी करेगी, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। 4 जून का बंद पूर्णतः शांतिपूर्ण होगा, लेकिन संदेश स्पष्ट होगा।”

झारखंड बंद को लेकर व्यापक समर्थन की तैयारी

जमशेदपुर में आयोजित इस बैठक में आदिवासी समाज के कई प्रमुख संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। चर्चा का केंद्रबिंदु रहा – बंद को राज्यव्यापी समर्थन दिलाना और इसे शांतिपूर्ण एवं सफल रूप से आयोजित करना।

सरकार की चुप्पी पर सवाल

आंदोलित संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से इन सभी मुद्दों पर सरकार से संवाद की कोशिश करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया या कार्यवाही नहीं हुई है। इससे नाराज होकर अब व्यापक जनांदोलन की राह अपनाई गई है।

The specified slider id does not exist.

और पढ़ें