Jamshedpur : पूर्वी सिंहभूम जिले के परसुडीह थाना क्षेत्र स्थित अधिसूचित ग्राम सभा जसकानडीह के ग्रामीणों ने शुक्रवार को अंचल कार्यालय, जमशेदपुर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। धरने के बाद ग्राम सभा की ओर से हातु मुंडा जगन्नाथ देवगम के नेतृत्व में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम अंचल अधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर पुलिसकर्मियों और कथित भू-माफियाओं की मिलीभगत से आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जे के प्रयास तथा ग्रामीणों को धमकाने का आरोप लगाया गया।
ग्राम सभा के हातु मुंडा जगन्नाथ देवगम ने बताया कि 13 जुलाई 2026 की शाम परसुडीह थाना के दो पुलिसकर्मी गांव पहुंचे और खाता संख्या 85, प्लॉट संख्या 16 से संबंधित भूमि विवाद के मामले में ग्रामीणों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने ग्राम सभा द्वारा विवादित जमीन पर लगाए गए बोर्ड को हटाने का दबाव बनाया तथा जान से मारने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी।
ग्राम सभा का दावा है कि संबंधित भूमि वर्ष 1932 के सर्वे रिकॉर्ड में मुकुंद भूमिज के नाम दर्ज है तथा बाद के अभिलेखों में महावीर प्रसाद का नाम दर्ज है। भूमि विवाद लंबित होने के कारण ग्राम सभा ने प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया है कि विवाद का समाधान होने तक उक्त जमीन पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद बाहरी लोगों द्वारा जमीन पर कब्जे का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले एक महीने से एक मोबाइल नंबर के माध्यम से ग्राम प्रधान पर थाना आने का दबाव बनाया जा रहा है। ग्राम सभा का कहना है कि भूमि विवाद का समाधान ग्राम सभा के स्तर पर ही किया जाएगा और जब तक अंचल अधिकारी का संकल्प पत्र उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक किसी प्रकार की जांच स्वीकार नहीं की जाएगी।
धरना को संबोधित करते हुए झारखंड आंदोलनकारी डेमका सोय ने कहा कि यदि मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं आरटीआई एक्टिविस्ट एवं आजसू जिला सचिव कृतिवास मंडल ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में ग्राम सभा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों में पुलिस हस्तक्षेप पर रोक लगाई जाए, सीएनटी एक्ट का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो, पेसा कानून-1996 एवं पेसा नियमावली-2026 को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तथा आदिवासी जमीन और अस्मिता की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
धरना-प्रदर्शन में सुनीता कुंकल, मोना देवगम, मजूमदार हेंब्रम, सुनील देवगम, रामचंद्र सिंह, जगदीश भूमिज, सोनू भूमिज, राजू भूमिज, अभि भूमिज, संगीता भूमिज, लखविंदर कुंकल, वृहस्पति सरदार, खुदीराम हांसदा, सोमवारी भूमिज, जानकी भूमिज सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण उपस्थित थे।
















