Jamshedpur:ग्रामीण भारत में डिजिटल खाई को पाटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जमशेदपुर क्वीयर सर्कल ने ग्राम केडो में डिजिटल शिक्षा लैब (Digital Shiksha Lab) का उद्घाटन किया। प्राइमरी स्कूल के पास स्थापित यह लैब प्रोजेक्ट शिक्षा, बेंगलुरु के सहयोग से शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और हाशिए पर रह रहे समुदायों के बच्चों, युवाओं और महिलाओं को डिजिटल शिक्षा और तकनीकी कौशल से जोड़ना है।
उद्घाटन समारोह में गांव का माहौल उत्साह और उम्मीद से भरा रहा। कार्यक्रम में 100 से अधिक लोगों की सहभागिता रही—जिसमें बच्चे, युवा, महिलाएँ, अभिभावक, समुदाय के वरिष्ठजन और मीडिया प्रतिनिधि शामिल थे। यह सहभागिता स्पष्ट संकेत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता और स्वीकार्यता तेज़ी से बढ़ रही है।
कार्यक्रम का उद्घाटन अंजुला सी. जुंझार (निदेशक, प्रोजेक्ट शिक्षा) ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “समावेशी और कौशल-आधारित डिजिटल शिक्षा वंचित समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। जब तकनीक सीखने के अवसर सबके लिए समान होंगे, तभी सामाजिक बदलाव संभव है।”
जमशेदपुर क्वीयर सर्कल—एक क्वीयर-नेतृत्व वाली सामाजिक संस्था—झारखंड में शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य, आजीविका और अधिकारों के क्षेत्रों में लगातार काम कर रही है। संस्था का लक्ष्य एक ऐसा समावेशी समाज बनाना है, जहाँ पहचान या पृष्ठभूमि के कारण कोई भी अवसरों से वंचित न रहे।
इस अवसर पर संस्था के फाउंडर सौविक साहा, नावीन कुमार और स्टाफ सदस्य उर्मिला हेंब्रोम भी उपस्थित रहीं। उन्होंने बताया कि डिजिटल शिक्षा लैब के माध्यम से फिलहाल 20 शिक्षार्थी नियमित रूप से कंप्यूटर प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रशिक्षण का फोकस व्यावहारिक कौशल पर है, ताकि प्रतिभागी शिक्षा, रोज़गार, सरकारी सेवाओं और दैनिक जीवन में तकनीक का प्रभावी उपयोग कर सकें।
ग्रामीण केडो में शुरू हुई यह लैब केवल कंप्यूटर सीखने की जगह नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और भविष्य के सपनों का केंद्र बनकर उभर रही है। जमशेदपुर क्वीयर सर्कल ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में भी ऐसे समावेशी और दीर्घकालिक कार्यक्रमों को विस्तार दिया जाएगा, ताकि डिजिटल युग में कोई भी बच्चा, युवा या महिला पीछे न छूटे।









