सारंडा जंगल में नक्सलियों की आईईडी विस्फोट की चपेट में आई 10 वर्षीय मादा हाथी, वन विभाग कर रहा इलाज

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Chaibsha : पश्चिमी सिंहभूम जिले के घने सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी (लैंडमाइन) की चपेट में आने से लगभग 10 वर्षीय मादा हाथी गंभीर रूप से घायल हो गई। विस्फोट में उसके आगे के दाहिने पैर में गहरा घाव हुआ है। घटना की जानकारी मिलते ही मनोहरपुर वन प्रक्षेत्र के अधिकारी और वन्यजीव चिकित्सक दल मौके पर पहुंचे और घायल हाथी का इलाज शुरू किया।

स्थानीय ग्रामीणों ने रविवार शाम जंगल में घायल अवस्था में हाथी को देखा और वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद टीम ने तत्काल राहत अभियान शुरू किया।
पशु चिकित्सक डॉ. संजय घोलटकर ने बताया कि हाथी को एंटीबायोटिक, सूजन और दर्द कम करने की दवाएं दी गई हैं। उन्होंने बताया कि “घाव गहरा है लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, पूरी तरह स्वस्थ होने में कुछ समय लग सकता है।”

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह तीसरी घटना है जब सारंडा जंगल में नक्सलियों के आईईडी विस्फोट से हाथियों को नुकसान पहुँचा है। इससे पहले दो मादा हाथियों की मौत हो चुकी है, जबकि इस तीसरे हाथी को बचाने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है।

प्रारंभिक जांच से पता चला है कि हाथी नक्सलियों के लैंडमाइन क्षेत्र से गुजर रही थी, जहाँ सुरक्षा बलों की आवाजाही होती रहती है। नक्सली इसी इलाके में आए दिन आईईडी लगाते हैं।

वन विभाग ने बताया कि घायल हाथी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, उसे प्रतिदिन औषधि और भोजन दिया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर उसे ट्रांजिट कैंप में ले जाकर आगे का इलाज किया जाएगा।

पिछले तीन महीनों में यह तीसरी घटना है, जिसमें सारंडा जंगल के हाथी आईईडी विस्फोट की चपेट में आए हैं, जिससे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों ने वन विभाग से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जंगली जीवों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की मांग की है।
विभाग ने भी अपील की है कि “ग्रामीण सतर्क रहें और यदि किसी घायल जंगली पशु की जानकारी मिले तो तुरंत सूचना दें, ताकि समय पर बचाव कार्य किया जा सके।”

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