Ghatshila : धालभूमगढ़ प्रखंड की रावताड़ा पंचायत के हाथीबारी गांव के समीप सूर्या नाला पर मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत लगभग 2.5 करोड़ रुपये की लागत से उच्च गुणवत्ता वाली पुलिया का निर्माण अंतिम चरण में है। निर्माण कार्य करीब 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। हालांकि पुलिया के स्थान को लेकर स्थानीय स्तर पर विवाद और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
कुछ लोगों का दावा है कि पुलिया पश्चिम बंगाल की सीमा में बन रही है, जबकि अन्य इसे झारखंड की भूमि पर निर्मित बता रहे हैं। इस बीच कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
इसी मुद्दे पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के प्रखंड अध्यक्ष सह विधायक प्रतिनिधि अर्जुन चंद्र हांसदा, जिला परिषद सदस्य हेमंत मुंडा तथा जिला उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता प्रणव कुमार महतो ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर स्थिति स्पष्ट की।
नेताओं ने बताया कि पुलिया निर्माण की स्वीकृति पूर्व विधायक स्वर्गीय रामदास सोरेन की अनुशंसा पर मिली थी। उन्होंने क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को सूर्या नाला पार करने में होने वाली कठिनाइयों को देखते हुए यहां पुल निर्माण का प्रस्ताव दिया था।
प्रेसवार्ता में जेएमएम नेताओं ने स्पष्ट किया कि पुलिया पश्चिम बंगाल के बीर मादल गांव और झारखंड के हाथीबारी गांव की सीमा से सटे नाले पर झारखंड क्षेत्र में बनाई जा रही है। हाथीबारी गांव के प्रधान शैलेंद्र नाथ मुर्मू तथा रावताड़ा ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने भी दावा किया कि निर्माण स्थल झारखंड की सीमा में है और कुछ लोग भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
नेताओं ने कहा कि पुलिया बनने से सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। पास स्थित पश्चिम बंगाल के उदल चूहा गांव में अस्पताल और विद्यालय हैं, जहां झारखंड के बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाज और शिक्षा के लिए जाते हैं। पुल निर्माण से दोनों राज्यों के सीमावर्ती गांवों के बीच आवागमन आसान होगा तथा स्थानीय लोगों को सुविधा मिलेगी।
जेएमएम नेताओं ने लोगों से अपील की कि इस जनहित परियोजना को लेकर किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें और विकास कार्यों में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि पुलिया क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।









