Ghatshila: दामपाड़ा क्षेत्र के ग्राम घोटिडूबा में आयोजित विशाल टुसू मेला इस बार सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति का जीवंत अनुभव बनकर सामने आया। जैसे ही गांव की पगडंडियों पर ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दी, मानो पूरा इलाका टुसू के रंग में रंग गया। मेले में हर उम्र, हर वर्ग के लोग उत्साह के साथ उमड़ पड़े—कहीं नृत्य की थाप, कहीं गीतों की मिठास और हर चेहरे पर पर्व की चमक।
मेले के मुख्य अतिथि घाटशिला विधायक सोमेश चंद्र सोरेन के आगमन पर ग्रामीणों ने पारंपरिक ढंग से भव्य स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ यह अभिनंदन, स्थानीय आत्मीयता और संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक बन गया। विधायक ने मेले का अवलोकन करते हुए टुसू प्रतिमाओं की साज-सज्जा, लोकगीतों और नृत्य-परंपराओं की मुक्त कंठ से सराहना की।
मेले का सबसे मनमोहक दृश्य तब देखने को मिला, जब टुसू प्रतिभागी सिर पर टुसू प्रतिमा धारण कर ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते नजर आए। कदमों की लय और गीतों की गूंज ने वर्षों पुरानी परंपराओं को जैसे वर्तमान में जीवित कर दिया। हर मोड़ पर लोककला, हर मंच पर संस्कृति—यह मेला सचमुच झारखंडी अस्मिता का उत्सव बन गया।
अपने संबोधन में विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने कहा कि ऐसे आयोजन झारखंड की समृद्ध लोक परंपराओं के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सफल आयोजन के लिए सभी टुसू प्रेमियों को बधाई दी और इस महापर्व के अवसर पर उपस्थित मेला प्रेमियों का “जोहार” के साथ अभिनंदन किया।









