दलमा में ईको विकास समितियों की कार्यशाला, जंगल संरक्षण और जनभागीदारी पर जोर

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Seraikela:चांडिल प्रखंड के दलमा वन्यजीव आश्रयणी क्षेत्र स्थित माकुलाकोचा में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से ईको विकास समितियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में दलमा अंचल के 85 मौजा से आए ईको विकास समिति के जनप्रतिनिधि, अध्यक्ष, सचिव और सदस्यों ने भाग लिया।

कार्यशाला का नेतृत्व रेंजर दिनेश चंद्रा ने किया, जहां मुख्य रूप से जंगलों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ईको-संवेदनशीलता को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों को जंगल में आग न लगाने, अनावश्यक पेड़ों की कटाई से बचने और वन्य जीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

रेंजर दिनेश चंद्रा ने अपने संबोधन में कहा कि जंगल में लगने वाली आग से न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं, बल्कि वन्यजीवों का जीवन भी संकट में पड़ जाता है, जिसका सीधा असर पर्यावरण संतुलन पर पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार ईको विकास समितियों से अपेक्षित कार्य अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाए हैं, इसी उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विभाग और समिति के सदस्यों के बीच क्षेत्रीय विकास और जंगल संरक्षण को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। रेंजर ने स्पष्ट किया कि विकास तभी संभव है जब विभाग और स्थानीय समुदाय मिलकर काम करें।

इसके साथ ही दलमा क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चल रही विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करना, वन्यजीवों की सुरक्षा करना और जंगल के संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र का सतत विकास करना है।

कार्यशाला ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से ही इसे सफल बनाया जा सकता है।

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