झामुमो ने आदित्यपुर नगर निगम से की खतियानी रैयतों को सम्मान देने की मांग, ‘बस्ती’ शब्द हटाने पर जोर

SHARE:

Adityapur:आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्यों और राजस्व ग्रामों के नामकरण की प्रक्रिया में बदलाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमों) ने शुक्रवार को एक अहम पहल की। झामुमो महानगर सचिव कृष्ण चंद्र महतो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए स्थानीय रैयतों और मूल निवासियों को उचित सम्मान दिलाने की मांग रखी।

ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा राजस्व ग्रामों के नाम के साथ ‘बस्ती’ शब्द जोड़ने पर आपत्ति जताना रहा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राजस्व ग्रामों की अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है, ऐसे में उनके मूल नामों में बदलाव या ‘बस्ती’ जोड़ना भावनात्मक रूप से उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी सरकारी अभिलेखों, निगम दस्तावेजों और व्यवहार में ग्रामों के मूल नामों का ही उपयोग हो।

दूसरा बड़ा मुद्दा खतियानी रैयतों की जमीन पर हुए विकास कार्यों से जुड़ा रहा। झामुमो ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में सड़क, भवन या अन्य सार्वजनिक संरचनाओं के निर्माण में रैयतों की भूमि का उपयोग एक प्रकार से ‘दान’ के बराबर है, इसलिए इन योगदानों को मान्यता मिलनी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि निगम के अमीन द्वारा उन सभी सार्वजनिक संरचनाओं की पहचान की जाए जो रैयती जमीन पर बनी हैं, और उनका नामकरण संबंधित रैयतों, खतियान धारियों या भूमि दानदाताओं के नाम पर किया जाए।

झामुमो ने कहा कि इससे न केवल स्थानीय लोगों का सम्मान बढ़ेगा, बल्कि झारखंडी अस्मिता और रैयतों की भूमिका को भी प्रशासनिक स्तर पर स्वीकृति मिलेगी।

इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में जगदीश महतो, रविंद्र बास्के, अभि मुखी, शंकर मुखी, डोनाल्ड मंगल, मंगल माझी, शिव लोहार, राहुल मुखी सहित कई लोग उपस्थित थे।


“राजस्व गाँव की अपनी पहचान होती है। उनके नाम के आगे ‘बस्ती’ जोड़ना अपमानजनक है। साथ ही जिन रैयतों की जमीन जनहित में उपयोग हुई है, उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। नगर निगम उन संरचनाओं की पहचान करे और उन्हें भूमि दानदाताओं के नाम पर नामित करे, यही वास्तविक सम्मान होगा।”

Leave a Comment

और पढ़ें