Potka : विद्या निकेतन प्लस टू विद्यालय, हल्दीपोखर के शिक्षक चिंतामणि त्रिपाठी ने अपने पुत्र के साथ पौधरोपण कर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया। उन्होंने इस पहल के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।
चिंतामणि त्रिपाठी ने कहा कि भगवान के अनेक रूप माने गए हैं। यदि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर प्रकृति संरक्षण और आत्मसंतुष्टि के उद्देश्य से नया वृक्ष, पुष्प या बीज लगाया जाए, अथवा पहले से लगाए गए पौधों के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, तो यह भी ईश्वर की भक्ति का एक रूप है।
उन्होंने कहा कि भगवान के जन्मोत्सव को प्रकृति संरक्षण से जोड़कर मनाना उत्सव का एक नया और सार्थक स्वरूप हो सकता है। उनके अनुसार, पौधरोपण के माध्यम से ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संकल्प भी लिया जा सकता है।
श्री त्रिपाठी की इस पहल की पौधरोपण और प्रकृति संरक्षण से जुड़े लोगों ने सराहना की। पूर्व सिविल सर्जन डॉ. ए.के. लाल ने भी इस पहल को अनोखा बताते हुए कहा कि प्रकृति को भगवान का दूसरा रूप माना जा सकता है। ऐसे में वृक्ष लगाकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाना आस्था और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संगम है।

















