Jamshedpur: पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड के ओड़िया मौजा अंतर्गत लाईडीह और चिरुडीह गांव के ग्रामीणों ने मंगलवार को अवैध पत्थर खनन के विरोध में साकची गोलचक्कर से उपायुक्त कार्यालय तक पैदल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लिए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने और पर्यावरण एवं ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लाईडीह में 10 एकड़ से अधिक तथा चिरुडीह में 8 एकड़ से अधिक क्षेत्र में पिछले लगभग 20 वर्षों से अवैध पत्थर खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खदान के आसपास स्कूल, आवासीय मकान और धार्मिक स्थल (गौरम थान) स्थित हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लाईडीह गांव के बीच से 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन खदान तक ले जाई जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, खदान में होने वाली ब्लास्टिंग से पत्थर और धूल के कण दूर-दूर तक उड़ते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उनका दावा है कि लगातार विस्फोट के कारण खदान में 500 फीट से अधिक गहरा गड्ढा बन चुका है।
समाजसेवी दुखनी सोरेन ने कहा कि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है और यहां पेसा कानून लागू है, लेकिन ग्रामसभा की सहमति के बिना खनन कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीणों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर जबरन पत्थरों का खनन जारी है, जिसका सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय खेती-बाड़ी का है, लेकिन ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर खेतों का काम छोड़कर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करता है, तो ग्रामीण जल सत्याग्रह शुरू करेंगे।
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीण महिला लक्ष्मी मनी मुर्मू ने आरोप लगाया कि जब ग्रामीण खदान का काम बंद कराने का प्रयास करते हैं, तो प्रशासन उनसे सवाल करता है। उन्होंने कहा कि उन्हें राशन या सरकारी योजनाओं का लाभ मिले या नहीं, उससे अधिक जरूरी गांव के लोगों का स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण है। उनका दावा है कि ब्लास्टिंग के कारण धूल, पत्थर और प्रदूषण से क्षेत्र का पानी भी दूषित हो गया है, जिससे लोगों के बीमार होने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अवैध खनन की निष्पक्ष जांच कराने, पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की।

















