Tamilnadu : तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने Thalapathy Vijay ने ऐसा सियासी भूचाल ला दिया है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। दशकों से राज्य की राजनीति पर कब्जा जमाए बैठी दो बड़ी ताकतों — Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) और All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) — के बीच अब विजय की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam यानी TVK ने खुद को मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है।
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि पहली बड़ी चुनावी लड़ाई में ही विजय की पार्टी सत्ता के बेहद करीब पहुंच गई है। TVK के खाते में 107 विधायक आए हैं, जबकि सहयोगी दलों के समर्थन से यह आंकड़ा 116 तक पहुंच चुका है। हालांकि सरकार बनाने के लिए 117 विधायकों का जादुई आंकड़ा चाहिए। ऐसे में तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जबरदस्त सस्पेंस बना हुआ है।
सत्ता की दहलीज पर विजय
फिल्मी पर्दे पर “मास हीरो” की छवि रखने वाले विजय ने राजनीति में भी वही आक्रामक अंदाज दिखाया है। उन्होंने युवाओं, मध्यम वर्ग और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को सीधे साधने की रणनीति अपनाई। भ्रष्टाचार, रोजगार, शिक्षा और तमिल अस्मिता जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने अपनी पार्टी को “नई राजनीति” का चेहरा बनाने की कोशिश की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से अलग एक भावनात्मक और जनसंपर्क आधारित मॉडल तैयार किया, जिसका असर चुनाव परिणामों में साफ दिखाई दिया। कई सीटों पर DMK और AIADMK के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाकर TVK ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया।
अब चर्चा में पुराना कांग्रेस कनेक्शन
इसी बीच राजनीतिक गलियारों में विजय की उस पुरानी कहानी की भी चर्चा तेज हो गई है, जब वह कांग्रेस में शामिल होने के बेहद करीब पहुंच गए थे।
करीब एक दशक पहले तमिलनाडु में कांग्रेस अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही थी। उस समय पार्टी ऐसे लोकप्रिय चेहरे की तलाश में थी, जो युवाओं के बीच प्रभाव रखता हो और दक्षिण भारत में कांग्रेस को नई पहचान दिला सके। इसी दौरान विजय का नाम गंभीरता से चर्चा में आया।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने विजय से संपर्क भी साधा था। उस दौर में विजय सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बयान देने लगे थे और उनकी फिल्मों में भी राजनीतिक संदेश दिखाई देने लगे थे। यही वजह थी कि कांग्रेस को लगा कि विजय भविष्य में बड़ा राजनीतिक चेहरा बन सकते हैं।
बताया जाता है कि प्रारंभिक स्तर पर बातचीत सकारात्मक भी रही, लेकिन विजय ने किसी दल में शामिल होने के बजाय अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने का रास्ता चुना। उनका मानना था कि किसी स्थापित पार्टी में शामिल होने से उनकी स्वतंत्र छवि प्रभावित हो सकती है। यही कारण रहा कि उन्होंने लंबा इंतजार किया और अंततः अपनी अलग पार्टी TVK का गठन किया।
क्यों खास है विजय का राजनीतिक सफर?
तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा और सत्ता का रिश्ता पुराना रहा है। M. G. Ramachandran, J. Jayalalithaa और M. Karunanidhi जैसे नेताओं ने फिल्मी लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदला था। अब उसी परंपरा को विजय नए दौर में आगे बढ़ाते दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अब सरकार गठन की है। बहुमत के लिए सिर्फ एक विधायक की जरूरत ने राजनीतिक हलचल और तेज कर दी है। तमिलनाडु में निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों की भूमिका अचानक बेहद अहम हो गई है।
आगे क्या?
राज्य की राजनीति फिलहाल इंतजार की स्थिति में है। क्या विजय बहुमत का आंकड़ा जुटाकर इतिहास रच पाएंगे, या फिर तमिलनाडु में राजनीतिक समीकरण आखिरी समय पर बदल जाएंगे — इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
लेकिन इतना तय है कि थलापति विजय ने तमिलनाडु की राजनीति में खुद को सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक गंभीर राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित कर दिया है।











