ADITYAPUR JAGRITI Maidan Bachao Andolan जागृति मैदान विवाद ‘खेलो इंडिया’ के नारे के बीच मैदान पर संकट, मनमोहन सिंह के नेतृत्व में तेज हुआ जनआंदोलन, 30 अप्रैल को होगा बड़ा शक्ति प्रदर्शन,

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ADITYAPUR : आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में स्थित जागृति मैदान को लेकर जारी विवाद अब जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। प्रस्तावित नगर निगम भवन निर्माण के विरोध में स्थानीय लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है। प्रेस क्लब अध्यक्ष और आदित्यपुर क्रिकेट अकादमी के अध्यक्ष मनमोहन सिंह के नेतृत्व में “मैदान बचाओ” अभियान ने अब रफ्तार पकड़ ली है।
“साझा धरोहर है जागृति मैदान”
मनमोहन सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि यह मैदान किसी एक वार्ड का नहीं, बल्कि वार्ड 27, 28, 29 और 30 के हजारों लोगों की साझा विरासत है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक मैदान पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य जनभावनाओं के खिलाफ होगा और इसे हर हाल में रोका जाएगा।
‘खेलो इंडिया’ बनाम जमीनी हकीकत
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल सरकार की नीतियों पर उठ रहा है। एक तरफ सरकार “खेलो इंडिया” जैसे अभियान के जरिए युवाओं और बच्चों को खेल के प्रति प्रोत्साहित करने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम बच्चों के खेलने-कूदने की खुली जगह को खत्म करने की तैयारी में है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मैदान ही नहीं बचेंगे, तो खिलाड़ी कहां से निकलेंगे? क्या “खेलो इंडिया” सिर्फ नारों तक सीमित रह जाएगा? यह विरोधाभास अब लोगों के आक्रोश का बड़ा कारण बनता जा रहा है।
30 अप्रैल को होगा बड़ा शक्ति प्रदर्शन
30 अप्रैल को प्रस्तावित वार्ड सभा को लेकर मनमोहन सिंह ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि हजारों लोग उस दिन एकजुट होकर यह संदेश देंगे कि जागृति मैदान को बचाने के लिए जनता पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह सभा आंदोलन की दिशा और ताकत दोनों तय करेगी।
खेल, संस्कृति और पहचान का सवाल
मनमोहन सिंह ने कहा कि जागृति मैदान सिर्फ एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि खेल गतिविधियों, सामाजिक आयोजनों और नई प्रतिभाओं का केंद्र रहा है। ऐसे में इस मैदान को खत्म करना आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
पार्षद को खुली चुनौती
कटाक्ष करते हुए उन्होंने वार्ड 30 के पार्षद को चुनौती दी कि वे 1000 लोगों की सभा के लिए स्थान बताएं, वह उसी जगह अपने समर्थकों के साथ जनसैलाब लेकर पहुंचेंगे और जनता की असली ताकत दिखाएंगे।
जनभावनाओं की अनदेखी पर चेतावनी
अंत में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जनता की भावनाओं को दरकिनार कर कोई निर्णय लिया गया, तो इसका जोरदार लोकतांत्रिक विरोध होगा। उन्होंने कहा कि अब लोग जाग चुके हैं और अपने हक के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।

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