Jamshedpur:जल–जंगल–ज़मीन की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले आदिवासी नेता और जनआंदोलनों के सशक्त स्वर सोमा मुंडा की खूंटी में हुई नृशंस हत्या को लेकर झारखंड में आक्रोश गहराता जा रहा है। इस जघन्य घटना के बाद झारखंड जनतांत्रिक महासभा ने बालिगुमा में आपात बैठक आयोजित कर कड़े शब्दों में हत्या की निंदा करते हुए इसे झारखंडी समाज की अस्मिता और लोकतांत्रिक संघर्ष पर सीधा हमला बताया है।
महासभा द्वारा जारी प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि सोमा मुंडा की हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि जल–जंगल–ज़मीन और संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा के लिए चल रहे संघर्ष को कुचलने की साजिश है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, खूंटी थाना क्षेत्र अंतर्गत जमुआदागा रोड स्थित तालाब के पास अज्ञात अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से सोमा मुंडा को गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
सोमा मुंडा क्षेत्र में एक लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता थे और 22 गांवों की सामूहिक आवाज के रूप में पहचाने जाते थे। जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर उनका बेबाक रुख सत्ता, माफिया और शोषक तंत्र को लगातार चुनौती देता रहा। इसी कारण इस हत्या को एक गहरी राजनीतिक और सामाजिक साजिश के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक में महासभा के नेता कृष्णा लोहार ने कहा कि यह हत्या पूरे झारखंडी समाज को डराने का प्रयास है। यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की, तो महासभा राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी। वहीं महासभा के दीपक रंजीत ने इसे कानून–व्यवस्था की गंभीर विफलता करार देते हुए कहा कि जब तक हत्यारों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा।
झारखंड जनतांत्रिक महासभा ने खूंटी जिला प्रशासन और राज्य सरकार से उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच, सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक अदालत में मुकदमा चलाने और कठोरतम सजा की मांग की है। साथ ही पीड़ित परिवार को सुरक्षा, सम्मानजनक मुआवजा और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की भी मांग की गई है।
महासभा ने सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में आहूत खूंटी बंद को पूर्ण समर्थन देते हुए चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन और अधिक व्यापक और निर्णायक रूप लेगा। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष सड़क से सदन तक हर स्तर पर जारी रहेगा।
“सोमा मुंडा अमर रहें” और “जल–जंगल–ज़मीन की लड़ाई जारी रहे” के नारों के साथ झारखंड एक बार फिर उबाल पर है।









