आरएसबी समूह ने वर्ष 2030 तक 50% रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने और 45% उत्सर्जन घटाने का संकल्प लिया

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Jamshedpur : इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में पांच दशकों से अधिक की नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहे आरएसबी समूह ने अपनी नवीनतम सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के माध्यम से समूह ने वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने और कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 45 प्रतिशत तक कमी लाने का स्पष्ट संकल्प दोहराया है। रिपोर्ट में ऊर्जा खपत, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, जल उपयोग और वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े विस्तृत प्रदर्शन आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं, जो ग्लोबल रिपोर्टिंग मानकों के अनुरूप हैं। स्थापना के समय से ही सस्टेनेबिलिटी आरएसबी की कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है, जिसने इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल उत्कृष्टता से जुड़े निर्णयों को दिशा दी है।

सस्टेनेबिलिटी की प्रमुख उपलब्धियां

पिछले तीन वर्षों में ऊर्जा उपयोग तीव्रता में 16 प्रतिशत सुधार

वित्त वर्ष 2022-23 की तुलना में स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन में 17 प्रतिशत की कमी

कुल अपशिष्ट का 97 प्रतिशत लैंडफिल में जाने से रोका गया

प्रक्रिया स्तर पर दक्षता पहलों से जल उपयोग में 4 प्रतिशत की कमी

वर्ष 2030 तक के लिए पांच वर्षीय डीकार्बनाइजेशन रोडमैप तैयार

नेतृत्व का संदेश

आरएसबी समूह के चेयरमैन आर. के. बेहरा ने कहा कि समूह की सस्टेनेबिलिटी यात्रा कारखाना स्तर पर मापनीय और व्यावहारिक कार्यों पर आधारित है। ऊर्जा दक्षता, उत्सर्जन में कमी और जल व अपशिष्ट के जिम्मेदार प्रबंधन पर केंद्रित यह प्रयास आरएसबी के 4पी फ्रेमवर्क—परपज, पीपल, प्रोसेस और प्लेनेट—से प्रेरित हैं। रिपोर्ट में दर्ज प्रगति यह दर्शाती है कि संचालन में अनुशासन, कुशल कार्यबल और स्पष्ट लक्ष्य किस प्रकार ठोस परिणाम देते हैं।

ऊर्जा एवं उत्सर्जन प्रदर्शन

रिपोर्ट के अनुसार, कुल ऊर्जा खपत 2,64,850 गीगा जूल रही, जो पिछले तीन वर्षों में लगभग 5 प्रतिशत की कमी को दर्शाती है। प्रति टन उत्पादन पर ऊर्जा उपयोग घटकर 1.50 गीगा जूल रह गया, जो वित्त वर्ष 2022-23 की तुलना में 16 प्रतिशत सुधार है।

स्कोप-1 और स्कोप-2 ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटकर 48,137 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य रह गया। इसी अवधि में स्कोप-1 उत्सर्जन में लगभग 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। प्रति टन उत्पादन पर उत्सर्जन स्तर 0.27 टन रहा, जो 17 प्रतिशत सुधार को दर्शाता है।

रिपोर्ट में रिन्यूएबल एनर्जी, ऊर्जा दक्षता पहलों और लो-कार्बन तकनीकों पर आधारित पांच वर्षीय डीकार्बनाइजेशन रोडमैप को रेखांकित किया गया है। इसके तहत वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने और 60 प्रतिशत वाटर न्यूट्रालिटी जैसे लक्ष्य तय किए गए हैं।

आरएसबी समूह के वाइस चेयरमैन एस. के. बेहरा ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी आरएसबी के लिए कोई अलग पहल नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन में अंतर्निहित है। उत्पाद डिजाइन से लेकर विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी तक हर निर्णय को दक्षता, जिम्मेदारी और दीर्घकालिक प्रभाव के दृष्टिकोण से लिया जाता है।

जल एवं वेस्ट मैनेजमेंट

रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति टन उत्पादन पर जल उपयोग घटकर 0.61 किलोलीटर हो गया, जो वर्ष दर वर्ष लगभग 4 प्रतिशत सुधार को दर्शाता है। वेस्ट मैनेजमेंट पहलों के जरिए कुल अपशिष्ट का लगभग 97 प्रतिशत लैंडफिल में जाने से रोका गया।

पर्यावरणीय प्रदर्शन के साथ-साथ रिपोर्ट में एंप्लॉई सेफ्टी, स्किल डेवलपमेंट और सामुदायिक सहभागिता पर भी विशेष जोर दिया गया है। आरएसबी फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सामाजिक पहलें संचालित की जा रही हैं।

सेबी बीआरएसआर और जीआरआई मानकों के अनुरूप यह सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट गवर्नेंस, डेटा-आधारित परफॉर्मेंस ट्रैकिंग और विनिर्माण कार्यों में सस्टेनेबिलिटी के एकीकरण पर आरएसबी के बढ़ते फोकस को दर्शाती है।

आरएसबी समूह के बारे में

वर्ष 1973 में स्थापित आरएसबी समूह ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स का एक अग्रणी निर्माता है, जिसकी वैश्विक उपस्थिति भारत, अमेरिका और मेक्सिको में है। समूह का उत्पाद पोर्टफोलियो प्रोपेलर शाफ्ट, गियरबॉक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपोनेंट्स को शामिल करता है।

संचालन उत्कृष्टता के लिए आरएसबी को वर्ष 2013 में जापान में डेमिंग पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं, जमशेदपुर स्थित आरएसबी के चार प्लांट्स को वर्ष 2019 में टीपीएम उत्कृष्टता पुरस्कार (श्रेणी-ए) प्राप्त हुआ। आरएसबी समूह नवाचार, गुणवत्ता और वैश्विक विस्तार के माध्यम से भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को लगातार सशक्त बना रहा है।

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