केडो गांव में डिजिटल शिक्षा की नई शुरुआत जमशेदपुर क्वीयर सर्कल ने किया डिजिटल शिक्षा लैब का उद्घाटन

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जमशेदपुर, झारखंड | 23 दिसंबर 2025

ग्रामीण और हाशिए पर रह रहे समुदायों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जमशेदपुर क्वीयर सर्कल द्वारा ग्राम केडो में डिजिटल शिक्षा लैब (Digital Shiksha Lab) का विधिवत उद्घाटन किया गया। यह लैब केडो प्राइमरी स्कूल के समीप, जमशेदपुर (झारखंड–832111) में स्थापित की गई है।

यह पहल प्रोजेक्ट शिक्षा, बेंगलुरु के सहयोग से शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों, युवाओं और महिलाओं को डिजिटल शिक्षा एवं तकनीकी कौशल से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

समावेशी विकास की दिशा में मजबूत कदम

जमशेदपुर क्वीयर सर्कल एक क्वीयर-नेतृत्व वाली सामाजिक संस्था है, जो झारखंड में शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य, आजीविका और अधिकारों के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। संस्था का लक्ष्य एक समावेशी समाज का निर्माण करना है, जहाँ हर व्यक्ति को समान अवसर मिल सके।

20 शिक्षार्थी ले रहे हैं नियमित प्रशिक्षण

डिजिटल शिक्षा लैब के माध्यम से फिलहाल 20 शिक्षार्थी नियमित रूप से कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उद्घाटन कार्यक्रम में 100 से अधिक लोगों की सहभागिता रही, जिनमें बच्चे, युवा, महिलाएँ, अभिभावक, स्थानीय समुदाय के सदस्य एवं मीडिया प्रतिनिधि शामिल थे। यह सहभागिता ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा की बढ़ती जरूरत को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

कौशल आधारित शिक्षा पर जोर

कार्यक्रम का उद्घाटन अंजुला सी. जुंझार (निदेशक, प्रोजेक्ट शिक्षा) ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि

समावेशी और कौशल-आधारित डिजिटल शिक्षा ही वंचित समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
इस अवसर पर जमशेदपुर क्वीयर सर्कल के फाउंडर सौविक साहा, नावीन कुमार एवं संस्था की स्टाफ सदस्य उर्मिला हेंब्रोम भी उपस्थित रहीं। उन्होंने समुदाय के साथ मिलकर इस पहल के सफल संचालन और बच्चों व युवाओं को तकनीक से जोड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई।

डिजिटल युग में पीछे न छूटे कोई भी

डिजिटल शिक्षा लैब के तहत प्रतिभागियों को व्यावहारिक कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे शिक्षा, रोजगार, सरकारी सेवाओं और दैनिक जीवन में तकनीक का प्रभावी उपयोग कर सकें।
जमशेदपुर क्वीयर सर्कल ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे समावेशी और दीर्घकालिक कार्यक्रम जारी रहेंगे, ताकि डिजिटल युग में कोई भी बच्चा, युवा या महिला पीछे न छूटे।

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