सूर्य सिंह बेसरा को हत्या की आशंका: गृह सचिव के आदेश के बावजूद नहीं मिला बॉडीगार्ड

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Jamshedpur:झारखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल और झारखंड राज्य निर्माताओं में से एकमात्र त्यागी विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जताई है। उनका कहना है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से उनके खिलाफ हत्या की साजिश रची जा सकती है, जबकि जनवरी 2025 में गृह सचिव के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्हें अब तक बॉडीगार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है।

सूर्य सिंह बेसरा के अनुसार, वे बिना अंगरक्षक के खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर वे शुक्रवार को जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से मिलकर अपनी बात रखने वाले हैं।

भुवनेश्वर में मिला खुफिया इनपुट, बढ़ी चिंता

15 से 17 दिसंबर के बीच सूर्य सिंह बेसरा ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में थे, जहां उनके गुरु एवं “भारतीय आदिम जाति सेवक संघ” के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे नयन चांद हेंब्रम के श्राद्ध कर्म में वे शामिल हुए। इसी दौरान उनकी मुलाकात दिल्ली, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आए सेवानिवृत्त खुफिया अधिकारियों से हुई। बातचीत के दौरान उन्हें संभावित खतरे को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई, जिसके बाद उनकी चिंताएं और गहरी हो गईं।

झारखंड आंदोलन से जुड़ा रहा अहम योगदान

बेसरा ने बताया कि वे ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) और झारखंड पीपुल्स पार्टी (JPP) के संस्थापक हैं। वर्ष 1989 में उनके नेतृत्व में हुए 72 घंटे के झारखंड बंद के बाद पहली बार केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच “झारखंड वार्ता” हुई थी।
1990 में वे अविभाजित बिहार के घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। जब तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने कहा था, “मेरी लाश पर झारखंड बनेगा”, तो उसके प्रतिवाद में बेसरा ने एक वर्ष पांच माह के भीतर विधायक पद से त्यागपत्र दे दिया था।

साहित्य और राजनीति दोनों में पहचान

सूर्य सिंह बेसरा को 2017 में “गीतांजलि” और “मधुशाला” के संताली अनुवाद के लिए साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली द्वारा सर्वोच्च साहित्य सम्मान से नवाजा गया था। वे राजनीति के साथ-साथ संविधान विशेषज्ञ के रूप में भी जाने जाते हैं।

बॉडीगार्ड हटाने पर सवाल

बेसरा का कहना है कि वर्ष 1990 से उन्हें सुरक्षा गारंटी के तहत अंगरक्षक मिला हुआ था, लेकिन बिना कोई ठोस कारण बताए सुरक्षा हटा ली गई। इस संबंध में उन्होंने पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, मुख्यमंत्री और गृह सचिव तक पत्राचार किया। अंततः जनवरी 2025 में गृह सचिव ने जमशेदपुर के पुलिस अधीक्षक को तत्काल अंगरक्षक प्रतिनियुक्त करने का आदेश दिया, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद आदेश पर अमल नहीं हुआ।

पूर्व हत्याओं का हवाला, खतरे की घंटी

सूर्य सिंह बेसरा ने झामुमो के इतिहास में हुई राजनीतिक हत्याओं का हवाला देते हुए कहा कि 8 अगस्त 1987 को निर्मल महतो और 4 मार्च 2007 को जमशेदपुर के सांसद सुनील कुमार महतो की हत्या हो चुकी है। उनका कहना है कि वे झामुमो सरकार के नीतिगत आलोचक रहे हैं, इसलिए बिना सुरक्षा के क्षेत्र में उनका दौरा खतरे से खाली नहीं है।

अब सवाल यह है कि जब गृह सचिव का आदेश स्पष्ट है, तो स्थानीय स्तर पर सुरक्षा उपलब्ध कराने में देरी क्यों हो रही है? यह न केवल एक पूर्व विधायक, बल्कि झारखंड राज्य आंदोलन से जुड़े एक अहम चेहरे की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बनता जा रहा है।

Leave a Comment

The specified slider id does not exist.