Ranchi: झारखंड की राजनीतिक चेतना और जनसंघर्ष की विरासत को एक बार फिर नई ऊर्जा मिली, जब रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास में एक गरिमामय समारोह आयोजित कर घाटशिला के नव-निर्वाचित विधायक सोमेश चन्द्र सोरेन को ऐतिहासिक जीत पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, तथा दिवंगत विधायक स्व. रामदास सोरेन की धर्मपत्नी सूरजमोनी सोरेन भी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम झारखंड राज्य की 25वीं स्थापना दिवस और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती की पावन तिथि पर आयोजित होने के कारण विशेष महत्व रखता था।
“38,600 वोटों का अंतर, लेकिन जीत में घमंड नहीं” — मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि
“चाहे 38,600 का अंतर हो, जीत में कभी घमंड नहीं होना चाहिए। यह जीत जनता के विश्वास, हमारी नीतियों और मेहनत का परिणाम है।”
उन्होंने भावुक होकर यह भी कहा कि गुरुजी और स्व. रामदास दा के न रहने से संगठन को गहरा आघात पहुँचा है, लेकिन उनके सपनों और संघर्षों को आधार बनाकर कार्यकर्ताओं ने साबित किया है कि—
“झामुमो सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, यह झारखंड की आत्मा और सांस्कृतिक चेतना है।”
सोमेश सोरेन को दी नसीहत और जिम्मेदारी का संदेश
मुख्यमंत्री ने नव-निर्वाचित विधायक सोमेश सोरेन को सलाह देते हुए कहा कि आने वाले समय में प्रदर्शन को और मजबूत करना होगा ताकि क्षेत्र के विकास की गाड़ी को वह स्वयं आगे बढ़ा सकें।
उन्होंने कहा—
“स्व. रामदास सोरेन जिस तरह कार्यकर्ताओं का सम्मान करते थे, उनके इस संस्कार को आगे बढ़ाना अब सोमेश बाबू की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”
“यह सिर्फ एक सीट की जीत नहीं”
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने इस जीत को
बुजुर्गों के आशीर्वाद, महिलाओं के विश्वास और युवाओं की ऊर्जा की जीत बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा छोड़कर झामुमो में शामिल हुए नेताओं ने उपचुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और आने वाले समय में एकजुटता झामुमो की सबसे बड़ी शक्ति होगी।
उपस्थिति और माहौल
मंच पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ
गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन,
स्व. रामदास सोरेन की धर्मपत्नी सूरजमोनी सोरेन,
नव-निर्वाचित विधायक सोमेश चन्द्र सोरेन
तथा आयोजन का संचालन कर रहे युवा मोर्चा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष विक्टर सोरेन उपस्थित रहे।
विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों कार्यकर्ता भी समारोह में भाग लेने पहुंचे, जिससे पूरा वातावरण उत्साह, गर्व और संघर्ष की ऐतिहासिक भावना से भर गया।









