जमशेदपुर में मानवता शर्मसार: अर्धनग्न हालत में युवती बरामद, जांच में जुटी पुलिस

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Jamshedpur : शहर के सिदगोड़ा थाना अंतर्गत बारीडीह चौक के पास सोमवार की देर रात एक अर्धनग्न और मानसिक रूप से असंतुलित युवती की बरामदगी ने शहर को झकझोर कर रख दिया। यह घटना पुराने होम्योपैथी सेंटर के पास घटी, जहां राहगीरों की नजर जब सड़क किनारे पड़ी युवती पर पड़ी, तो उन्होंने तत्क्षण पुलिस को सूचित किया।

पुलिस ने पहुंचकर बचाई जान, एमजीएम अस्पताल में इलाज जारी

सूचना मिलते ही सिदगोड़ा थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और युवती को कंबल से ढंकते हुए एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया। युवती बेहद डरी, सहमी और मानसिक रूप से असंतुलित प्रतीत हो रही थी। पुलिस के अनुसार वह अपना नाम-पता स्पष्ट नहीं बता पा रही है, जिससे उसकी पहचान सुनिश्चित नहीं हो सकी है।

मेडिकल जांच रिपोर्ट का इंतजार, बलात्कार की पुष्टि नहीं

युवती की मेडिकल जांच कराई जा चुकी है, लेकिन रेप की पुष्टि के लिए फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने फिलहाल इस बिंदु पर कोई निष्कर्ष निकालने से इनकार किया है और जांच को “हर एंगल से” करने की बात कही है।

सीसीटीवी फुटेज से सुराग ढूंढने की कोशिश

पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि यह पता चल सके कि युवती वहां कैसे पहुंची और क्या किसी व्यक्ति की भूमिका इसमें संदिग्ध है। अब तक कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया है, लेकिन पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है।

इलाके में युवती को पहले भी भटकते देखा गया था

प्राथमिक जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि युवती को हाल के दिनों में बारीडीह और उसके आसपास कई बार भटकते देखा गया है। स्थानीय दुकानदारों ने दावा किया कि वह अक्सर बिना दिशा के घूमती रहती थी और लोगों से संवाद भी नहीं कर पाती थी। ऐसे में मानसिक विकार का एंगल भी जांच में शामिल किया गया है।

पुलिस का बयान: “मामला संवेदनशील, हर पहलू से जांच जारी”

सिदगोड़ा थाना प्रभारी ने प्रेस से बात करते हुए कहा कि, “फिलहाल युवती की मानसिक स्थिति स्पष्ट नहीं है, और उसका बयान अस्पष्ट है। हम पूरी सतर्कता से जांच कर रहे हैं और जल्द ही सच्चाई सामने लाएंगे।”

शहर में आक्रोश, सामाजिक संगठनों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

इस घटना के बाद शहर में चिंता और रोष का माहौल है। सामाजिक व महिला संगठनों ने प्रशासन से तेज और निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही यह भी मांग उठी है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ महिलाओं के लिए आश्रय गृह और सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल जरूरत है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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