Jamshedpur : आपसे विनम्र निवेदन है कि झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से शराब की बिक्री प्रारंभ करने की योजना पर पुनर्विचार करें। यह योजना राज्य की भोली-भाली ग्रामीण जनता, विशेषकर आदिवासी, मूलवासी, किसान, मजदूर, छात्र और युवाओं के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध हो सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अधिकांश आबादी की आय का मुख्य स्रोत खेती, मजदूरी, वन उपज (जैसे महुआ, पत्ता, लकड़ी), मुर्गी-बकरी पालन और छोटे-मोटे व्यापार हैं। उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे नियमित रूप से शराब जैसी महंगी वस्तु का सेवन कर सकें। इसके बावजूद यदि शराब दुकानों को गांवों तक पहुंचाया जाता है, तो इससे सामाजिक ताना-बाना और पारिवारिक संरचना पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

संभावित दुष्परिणामों में शामिल हैं:
आपराधिक घटनाओं में वृद्धि (हत्या, बलात्कार, मारपीट, चोरी आदि)
घरेलू हिंसा और पारिवारिक टूटन
बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव
महिला सुरक्षा पर खतरा
बेरोजगारी से त्रस्त युवाओं का शराब की लत में फंसना

यदि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व में वृद्धि है, तो इसके लिए अन्य वैकल्पिक एवं जनहितकारी उपाय अपनाए जा सकते हैं जैसे—
बालू घाटों का पारदर्शी बंदोबस्ती
अवैध खनन पर सख्त नियंत्रण
कोयला और खनिज संपदाओं के उचित दोहन से राजस्व
सड़कों पर ओवरलोडिंग रोकने हेतु जुर्माना
विकास योजनाओं में पारदर्शिता और ओवर-एस्टिमेटिंग पर रोक

मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन उपायों से राज्य को शराब बिक्री से भी अधिक राजस्व प्राप्त हो सकता है, और साथ ही सामाजिक स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों की रक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। अतः आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शराब दुकानें खोलने की योजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा झारखंड के भविष्य—हमारी ग्रामीण जनता—को इस नशे के जाल से सुरक्षित रखा जाए।









