Songs of the Forest : जैव विविधता दिवस पर टाटा स्टील फाउंडेशन की अनूठी पहल

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Jamshedpur : अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन ने अपनी नई पुस्तक ‘जंगल के गीत’ का भव्य लोकार्पण किया। यह पुस्तक आदिवासी समुदायों की समृद्ध जैव विविधता संबंधी लोककथाओं और परंपराओं को संरक्षित करने का एक अनूठा प्रयास है। यह कार्यक्रम टाटा स्टील के सुकिंदा क्रोमाइट माइंस परिसर में आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य उन कहानियों और पारंपरिक ज्ञान को सहेजना है जो पीढ़ियों से मौखिक रूप में आदिवासी समाजों में प्रचलित हैं। फाउंडेशन ने इस दिशा में ग्रामीण बुजुर्गों, किस्सागो और ज्ञान संरक्षकों के साथ गहन संवाद कर यह संकलन तैयार किया है।



पुस्तक का अनावरण करते हुए टाटा स्टील के फेरो अलॉयज एंड मिनरल्स डिवीजन के कार्यकारी प्रमुख पंकज सतीजा ने कहा, “हम केवल कहानियों को नहीं, बल्कि विरासत, ज्ञान और पारिस्थितिकी के प्रति गहरी चेतना को सहेज रहे हैं। यह दुनिया को आदिवासी दृष्टिकोण से देखने का प्रयास है – जहां मानव, प्रकृति का साथी होता है, विजेता नहीं। यह पुस्तक इस वर्ष की थीम ‘प्रकृति के साथ सामंजस्य और सतत विकास’ को भी प्रतिध्वनित करती है।”



यह विचार 2023 में जैव विविधता दिवस पर आयोजित एक कहानी सत्र से उत्पन्न हुआ था, जिसमें युवाओं और बुजुर्गों ने जैव विविधता के महत्व पर अपने अनुभव साझा किए थे। इन्हीं प्रेरक कथाओं और पारंपरिक ज्ञान को स्थायी रूप देने के लिए इस पुस्तक को तैयार किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित टाटा स्टील फाउंडेशन के सीएसआर प्रमुख (ओडिशा) डॉ. अम्बिका प्रसाद नंदा ने कहा, “यह ग्रह विभिन्न जीवों का घर है और हमें उनके साथ सामंजस्य में रहना सीखना चाहिए। तभी यह पृथ्वी सुंदर बन सकेगी।”



‘जंगल के गीत’ पुस्तक प्रिंट और डिजिटल दोनों स्वरूपों में उपलब्ध है और इसमें आदिवासी समाजों के प्रकृति से जुड़ाव, पारंपरिक संरक्षण पद्धतियों, स्थानीय वनस्पति और जीव-जंतुओं की जानकारी तथा उनके आध्यात्मिक जुड़ाव का दस्तावेजीकरण किया गया है।



कार्यक्रम के दौरान जैव विविधता के विशेषज्ञों जैसे डॉ. अरुण कुमार मिश्रा (सेवानिवृत्त मुख्य वन संरक्षक, ओडिशा सरकार), गायत्री देवी (जैवविज्ञानी व ‘ग्रो विद नेचर’ की संस्थापक), डॉ. श्वेताश्री पुरोहित और डॉ. जयंत त्रिपाठी (यूनिट लीड, सुकिंदा-बामनिपाल) ने पैनल चर्चाओं के माध्यम से दर्शकों को प्रेरित किया।

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