Jamshedpur:4 फरवरी को मनाए जाने वाले विश्व कैंसर दिवस से पहले जमशेदपुर स्थित टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) कैंसर चिकित्सा को अधिक सुलभ, संगठित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक मजबूत उदाहरण के रूप में उभर रहा है। जहाँ वैश्विक स्तर पर कैंसर की शुरुआती पहचान, समय पर उपचार और निरंतर देखभाल पर जोर दिया जा रहा है, वहीं टीएमएच स्थानीय स्तर पर एक समग्र और भरोसेमंद ऑन्कोलॉजी इकोसिस्टम खड़ा करने में लगातार जुटा है।
बीते वर्षों में टाटा मेन हॉस्पिटल ने अपने कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर केयर सेंटर को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया है। मेडिकल, सर्जिकल, रेडिएशन और पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी सेवाओं को एक ही समन्वित ढांचे में जोड़कर अस्पताल ने मरीजों के लिए इलाज की पूरी श्रृंखला को एक छत के नीचे उपलब्ध कराया है। इसका सीधा लाभ यह हुआ है कि गंभीर मरीजों को बड़े शहरों में रेफर करने की आवश्यकता काफी हद तक कम हुई है और इलाज में होने वाली देरी पर भी अंकुश लगा है।
अस्पताल की ऑन्कोलॉजी टीमें बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) योजना के तहत काम करती हैं। नियमित ट्यूमर बोर्ड मीटिंग, विभिन्न विशेषज्ञों के बीच आपसी समन्वय और साक्ष्य-आधारित उपचार प्रोटोकॉल टीएमएच की कैंसर देखभाल को एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। यही वजह है कि यहाँ शुरुआती अवस्था से लेकर जटिल और एडवांस कैंसर मामलों तक का प्रबंधन आत्मविश्वास के साथ किया जा रहा है।
मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में आधुनिक कीमोथेरेपी रेजीमेन के साथ-साथ टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी उन्नत उपचार विधियों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सर्जिकल ऑन्कोलॉजी टीमें सिर और गर्दन, जठरांत्र, स्त्रीरोग तथा मूत्ररोग से जुड़े कैंसरों में जटिल शल्य प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दे रही हैं। इन सर्जरी के बाद पुनर्निर्माण (रिकंस्ट्रक्शन) और सहायक देखभाल सेवाएँ मरीजों की रिकवरी और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। रेडिएशन और पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी सेवाएँ इस देखभाल श्रृंखला को और मजबूत करती हैं।
इस एकीकृत मॉडल की झलक अस्पताल में उपचारित कुछ चुनौतीपूर्ण मामलों में भी साफ दिखाई देती है। हाल ही में सिर और गर्दन के एडवांस कैंसर से पीड़ित एक मरीज की द्विपक्षीय बाईलेटरल मैक्सिलेक्टॉमी के बाद नियोजित रिकंस्ट्रक्शन किया गया। इस जटिल प्रक्रिया में सर्जिकल, रिकंस्ट्रक्टिव और पोस्ट-ऑपरेटिव टीमों के बीच सूक्ष्म समन्वय देखने को मिला, जिससे कैंसर नियंत्रण के साथ-साथ मरीज की कार्यक्षमता (फंक्शनल रिहैबिलिटेशन) भी सुनिश्चित की जा सकी।
एक अन्य एडवांस कैंसर मामले में मरीज को सुव्यवस्थित सिस्टमिक थेरेपी के माध्यम से निरंतर इलाज दिया गया। नियमित निगरानी और फॉलो-अप के चलते रोग की स्थिति को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने में सफलता मिली, जो यह दर्शाता है कि उन्नत अवस्था में भी व्यक्तिगत उपचार रणनीति और सतत देखभाल निर्णायक साबित हो सकती है।
टीएमएच का जोर किसी एक उपचार पद्धति पर नहीं, बल्कि संरचित योजना, बहु-विषयक सहयोग और निरंतर चिकित्सकीय सहभागिता पर है। अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि समुदाय को चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त, नैतिक रूप से जिम्मेदार और आर्थिक रूप से सुलभ कैंसर देखभाल उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
विश्व कैंसर दिवस के मौके पर टाटा मेन हॉस्पिटल का संदेश स्पष्ट है—जागरूकता बढ़े, लोग समय पर चिकित्सकीय परामर्श लें और स्थानीय स्तर पर मजबूत कैंसर केयर सिस्टम विकसित हो। निरंतर क्षमता सुदृढ़ीकरण और संगठित ऑन्कोलॉजी सेवाओं के माध्यम से टीएमएच कैंसर उपचार को मरीजों के घर के नजदीक ला रहा है, जिससे न केवल मरीजों बल्कि उनके परिवारों को भी इलाज की पूरी प्रक्रिया में भरोसेमंद सहयोग मिल रहा है।









