Jamshedpur:झारखंड सरकार की दूसरी पारी के एक वर्ष पूरे होने पर जहां पूरे राज्य में उपलब्धियों की चमक बिखेरी जा रही है, वहीं जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि “मुख्यालय से उपलब्धियों की घोषणाएँ होती रहेंगी, सरज़मीं पर इनकी कब्रगाह बनती रहेगी।”
सरयू राय ने कहा कि सरकार ने 10,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र देने और ‘आपकी सरकार—आपके द्वार’ जैसे कार्यक्रमों को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन कई पुराने कार्यक्रम धरातल पर दम तोड़ चुके हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
‘सेवा का अधिकार’ दम तोड़ चुका— सरयू राय
राय ने आरोप लगाया कि सेवा का अधिकार अधिनियम पूरी तरह निष्क्रिय पड़ चुका है।
उन्होंने कहा—
“एक सप्ताह के लिए इसे याद करना जले पर नमक छिड़कने जैसा है।”
सरकारी कार्यालयों में न तो अधिनियम से जुड़े पट्ट लगे हैं और न ही लोगों को पता कि इस क़ानून के तहत उनके अधिकार क्या हैं।
हज़ारों आवेदन महीनों से लंबित हैं, लोग चक्कर काट रहे हैं और कर्मचारी ‘सेवा शुल्क’ के नाम पर वसूली कर रहे हैं।
करोड़ों खर्च कर बनी संरचनाएँ जर्जर— उपयोग शून्य
सरयू राय ने कहा कि सरकार द्वारा भेजी गई निधियों से कई इमारतें तो बन गईं, लेकिन शुरू न होने के कारण वे अब खंडहर बनने लगी हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा—
कदमा का कन्वेंशन सेंटर
साकची का डीएम लाइब्रेरी भवन
दोनों ही करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए, पर पाँच साल बीत जाने के बाद भी शुरू नहीं हो सके।
नगर निगमों और नगर परिषदों पर गंभीर सवाल
श्री राय ने 15वें वित्त आयोग से मिली भारी भरकम राशि के उपयोग पर भी प्रश्न उठाया।
उन्होंने पूछा—
“जेएनएसी, मानगो नगर निगम, आदित्यपुर नगर निगम, जुगसलाई नगर परिषद— सभी को करोड़ों रुपये मिले। सरकार बताए कि इस धन का हुआ क्या?”
उन्होंने कहा कि डीएमएफटी और स्वास्थ्य विभाग के कारनामे रोज़ सुर्खियों में रहते हैं, इसलिए मुख्यमंत्री को इन पर भी नज़र डालनी चाहिए।
“घोषणाएँ नहीं, धरातल पर बदलाव दिखे”— राय की मांग
विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक जमीन पर पुराने कार्यक्रमों की समीक्षा और सुधार नहीं किया जाता, तब तक नई घोषणाएँ सिर्फ कागज़ों में ही चमकती रहेंगी।









