Adityapur : डीएलएसए हॉल, सरायकेला में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) एवं मासिक लोक अदालत को लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, डीएलएसए सरायकेला-खरसावां रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यशाला में जिला परिवहन पदाधिकारी गिरिजा शंकर महतो, एसडीपीओ समीर सावैया, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पंकज तथा मुख्य एलएडीसी दिलीप कुमार शॉ सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा जिले के विभिन्न थानों के पुलिस अधिकारी, एएनएम, जिला परिवहन कार्यालय के प्रतिनिधि, बाल कल्याण समिति के सदस्य, पैनल अधिवक्ता एवं पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
अपने संबोधन में रामाशंकर सिंह ने कहा कि एमएसीटी से जुड़े मामलों में आवेदन छह माह के भीतर दाखिल करना आवश्यक है और फॉर्म-54 को सही तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा दिलाने में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
कार्यक्रम के दौरान तौसीफ मेराज ने झारखंड मोटर वाहन दावा न्यायाधिकरण की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए सर्वोच्च न्यायालय के शारला वर्मा एवं प्रणय सेठी मामलों के ऐतिहासिक फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एमएसीटी अधिनियम एक कल्याणकारी कानून है, जिसका उद्देश्य दुर्घटना में घायल व्यक्तियों और मृतकों के आश्रितों को त्वरित न्याय दिलाना है।
जिला परिवहन पदाधिकारी गिरिजा प्रसाद महतो ने गुड समैरिटन कानूनों की जानकारी देते हुए नागरिकों को दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने को प्रेरित किया। वहीं उप मुख्य एलएडीसी सुनीत कर्मकार ने एफआईआर की महत्ता और न्यायिक प्रक्रिया में उसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
इस दौरान आयोजित मासिक लोक अदालत में बिजली से संबंधित 5 मामलों का निपटारा किया गया, जिससे 24 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वादकारियों ने त्वरित न्याय मिलने पर संतोष व्यक्त करते हुए लोक अदालत की उपयोगिता की सराहना की।








