Adityapur : स्थानीय बिरसा मुंडा स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय राजकीय छऊ नृत्य महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को सांस्कृतिक वैभव अपने चरम पर दिखा। कार्यक्रम का शुभारंभ मंच पूजन एवं पारंपरिक ‘मंगलाचरण के यात्रा घट’ के साथ विधिवत रूप से किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए अतिथियों ने छऊ नृत्य की समृद्ध परंपरा और इसकी वैश्विक पहचान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छऊ केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पहचान का प्रतीक है। साथ ही आधुनिकता के दौर में इस कला को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कलाकारों के योगदान की सराहना की और सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
मंगलाचरण के उपरांत विभिन्न छऊ नृत्य केंद्रों से आए कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुखौटों के पीछे कलाकारों के सधे कदम और ढोल, नगाड़ा व शहनाई की गूंज ने पूरे स्टेडियम को उत्साह से भर दिया। कलाकारों ने पौराणिक कथाओं के साथ-साथ समसामयिक विषयों को भी नृत्य के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में सोना महापात्रा की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही, वहीं एमजे5, जितराय हांसदा द्वारा रिंझा नृत्य, संतोष कुमार महतो का नाटुआ नृत्य, आकांक्षा मिश्रा का कथक, द्रोपदी महतो का मानभूम शैली नृत्य, हेमंत कुमार बेहरा का गोटीपुआ, लक्ष्मीधर धुनिया का मयूरभंज नृत्य, लखन गुड़िया का मुंडारी नृत्य, असम की हेमंती देवी का तेजपुरिया नृत्य, लालू उरांव का उरांव नृत्य तथा श्रेया पंडा की लोकनृत्य प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।
इस अवसर पर जिले के कई वरीय पदाधिकारी, छऊ गुरु एवं कला प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। देर रात तक चले इस भव्य आयोजन में स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आए दर्शकों ने भी छऊ की अनुपम कला का आनंद लिया।











