नो-एंट्री लागू करने की मांग पर ग्रामीणों का आंदोलन तेज, गांव-गांव में बैठकों से उठी एकजुट आवाज — रमेश बालमुचू

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Manoharpur   : राष्ट्रीय राजमार्ग पर नो-एंट्री लागू कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों का जनआंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार को ग्राम आयता, टेकासाई, डोबरोसाई, गितीलपी, सिंह पोखरिया, सुरलु और अंगड़िया सहित कई गांवों में मुंडा की अध्यक्षता में सामूहिक बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने एकस्वर में कहा कि यदि सरकार ने जनहित में नो-एंट्री लागू नहीं किया, तो आंदोलन को जिले से राज्य स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।

बैठक का संचालन समाजसेवी प्रधान तमसोय ने किया। उन्होंने कहा, “झारखंड सरकार आम जनता की जान को पशुओं से भी कम महत्व दे रही है। सड़क हादसों में प्रतिदिन मासूम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, लेकिन सरकार खामोश है। चुनाव के समय नेताओं द्वारा किए गए वादे सिर्फ कागजों तक सीमित हो जाते हैं।”

युवा नेता संजय सरीर देवगम ने सरकार पर उद्योगपतियों के हित में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “रुंगटा ग्रुप जैसे बड़े औद्योगिक घरानों के वाहनों को निर्बाध परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि ग्रामीणों की सुरक्षा और जीवन हाशिए पर छोड़ दिया गया है। ट्रकों की लगातार आवाजाही से सड़कें जाम रहती हैं और दैनिक जीवन प्रभावित होता है।”

वहीं युवा नेता गुरु हो सिंकु ने भावुक अपील करते हुए बताया कि सड़क दुर्घटना में वे अपने छोटे भाई को खो चुके हैं। उन्होंने कहा, “यह संघर्ष व्यक्तिगत नहीं, बल्कि जनजीवन की सुरक्षा की लड़ाई है। यदि नो-एंट्री लागू नहीं हुआ, तो ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं।”

इस आंदोलन को समर्थन देने वालों में समाजसेवी रमेश बालमुचू, अधिवक्ता महेंद्र जामुदा, युवा नेता रेयांस समाड, हरिश समाड, बुधराम गोप और मंगल सिंह पाड़ेया सहित कई गणमान्य लोग शामिल रहे।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आने वाले दिनों में संबंधित विभागों एवं जनप्रतिनिधियों से सामूहिक रूप से मुलाकात कर नो-एंट्री लागू करने की मांग को औपचारिक रूप से रखा जाएगा। यदि फिर भी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन की रणनीति अपनाई जाएगी।

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