Chaibasa:पश्चिम सिंहभूम जिला इन दिनों जंगली हाथियों के आतंक से दहशत में है। गजराज अब ग्रामीणों के लिए यमराज बनते जा रहे हैं। बीते एक सप्ताह के भीतर हाथियों के हमले में अब तक 17 ग्रामीणों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। ताजा जानकारी के अनुसार, बीती रात नोवामुंडी क्षेत्र में सात ग्रामीण हाथियों के हमले का शिकार हो गए, जिससे पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है।
भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए राज्य सरकार और वन विभाग की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि वन विभाग के वरीय अधिकारी केवल बयानबाजी कर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। अब तक किसी भी वरिष्ठ वन अधिकारी ने मृतकों के परिजनों से मिलकर संवेदना प्रकट करना भी उचित नहीं समझा है। केवल 20 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता देकर महज औपचारिकता निभाई जा रही है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि 5 जनवरी को ही जिले के उपायुक्त को पत्र लिखकर हाथियों से ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा को लेकर वन विभाग के लापरवाह रवैये से अवगत कराया गया था, इसके बावजूद हालात नहीं सुधरे और सात और ग्रामीणों की जान चली गई।
पार्टी ने इस स्थिति को “अमानवीय नरसंहार” करार देते हुए कहा है कि राज्य सरकार सीधे तौर पर इसकी जिम्मेदार है, क्योंकि वन मंत्रालय स्वयं मुख्यमंत्री के अधीन है। भाजपा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे स्वयं पश्चिम सिंहभूम पहुंचकर हाथियों के हमले में मारे गए ग्रामीणों के परिजनों से मिलें, मानवीय संवेदना प्रकट करें और प्रत्येक मृतक परिवार को कम से कम 10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करें।
इसके साथ ही हाथियों के हमले में घायल ग्रामीणों के बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची के किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती कराने तथा लापरवाह वन अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।









