मौजा ढीपा माकासाई में पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया मागे पोरोब

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Manoharpur:आदिवासी हो समाज के मौजा ढीपा माकासाई में पारंपरिक पर्व ‘मागे पोरोब’ हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। गांव में सुबह से ही उत्सवी माहौल देखने को मिला, जहां पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुष अपनी सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रदर्शन करते नजर आए।
मागे पोरोब, जो हो समुदाय का प्रमुख कृषि और सांस्कृतिक पर्व है, प्रकृति, धरती और समृद्धि के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने दामा और दुमेग जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर सामूहिक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए। पूरे गांव में लोकधुनों की गूंज और पारंपरिक ताल ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
पर्व के आयोजन में गांव के देवरी विक्रम जोजो एवं जोम सिम सुखराम जोजो की अगुवाई में विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार देवी-देवताओं से सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और समाज की उन्नति की कामना की गई।
कार्यक्रम में विश्वनाथ जोजो, राऊतु समाड, दशरथ जोजो, सोमा समाड, बागुन काडेयाग, शंकर बोदरा, राम जोजो, विष्णु समाड, सुखराम समाड, तुराम समाड, सिरका समाड, बैसगी जोजो, पूर्णिमा समाड, कैरी समाड और सीता जोजो सहित गांव के सभी महिला-पुरुषों की सक्रिय भागीदारी रही।
सामूहिक नृत्य, गीत-संगीत और पारंपरिक अनुष्ठानों ने न केवल सामाजिक एकता को मजबूत किया, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश भी दिया। मागे पोरोब के माध्यम से गांव में आपसी भाईचारा और सामुदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल देखने को मिली।

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