समाज सेवा, सुशासन और विकास के प्रतीक थे कर्मयोगी सीताराम रुंगटा

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Chaibasa : कर्मयोगी सीताराम रुंगटा का संपूर्ण जीवन समाज सेवा, जनकल्याण और नगर विकास को समर्पित रहा। उन्हें जिस भी पद की जिम्मेदारी सौंपी गई, उन्होंने उसे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और कुशलता के साथ निभाया। यह बातें वरीय प्रबंधक सुरेश पोद्दार ने उनके जीवन और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कही।

सुरेश पोद्दार ने बताया कि सीताराम रुंगटा दलितों, गरीबों और शोषित वर्गों के प्रति गहरी संवेदनशीलता रखते थे। समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की चिंता करना उनकी कार्यशैली का मूल मंत्र था। इसी कारण वे जनमानस के बीच “कर्मयोगी” के रूप में विख्यात हुए।

सीताराम रुंगटा ने 1946 से 1950 तक चाईबासा नगर पालिका के उपाध्यक्ष तथा 1951 से 1989 तक लगातार 38 वर्षों तक नगर पालिका के चेयरमैन के रूप में सेवा दी। उनके दीर्घ कार्यकाल में चाईबासा नगर का सर्वांगीण विकास हुआ। सड़कों, आधारभूत संरचनाओं, सार्वजनिक स्थलों और नागरिक सुविधाओं के सुनियोजित विकास की छाप आज भी नगर में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।

उद्योग और व्यापार जगत में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे सीताराम इलेक्ट्रोकेमिकल्स ओड़िशा लिमिटेड में प्रबंध निदेशक (एमडी) के पद पर कार्यरत रहे और अपने दूरदर्शी एवं शालीन नेतृत्व से कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इसके साथ ही उन्होंने ईस्टर्न जोन माइनिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में संगठन को नई दिशा दी।

उन्होंने बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स (पटना), बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (पटना), वनस्पति एसोसिएशन तथा ओड़िशा फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल सहित कई प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

केंद्र सरकार के स्तर पर उन्होंने कॉमर्स मंत्रालय, स्टील एंड माइंस मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय और श्रम मंत्रालय में विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। इसके अलावा बिहार और ओड़िशा सरकार के लिए भी उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया। वे छोटानागपुर प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड तथा रांची क्षेत्र ट्रांसपोर्ट के सदस्य भी रहे।

सीताराम रुंगटा का जन्म दिसंबर 1920 में हुआ था और उनका निधन 17 अप्रैल 1994 को हुआ। वे प्रख्यात उद्योगपति एवं समाजसेवी स्वर्गीय मांगीलाल रुंगटा के पुत्र थे। उन्होंने अपने पिता द्वारा स्थापित व्यवसाय को और विस्तार दिया। उनकी प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा कोलकाता में हुई। उन्होंने 1940 में कोलकाता विश्वविद्यालय से आईएमसी परीक्षा उत्तीर्ण की तथा विद्यासागर कॉमर्स कॉलेज से बी.कॉम की डिग्री प्राप्त की।

रुंगटा ग्रुप का व्यवसाय आयरन ओर, मैंगनीज ओर, क्रोमाइट, काइनाइट, ग्रेफाइट, लाइमस्टोन, डोलोमाइट और चीनी मिट्टी के खनन से जुड़ा रहा। सामाजिक क्षेत्र में वे रेड क्रॉस सोसाइटी, पश्चिम सिंहभूम जिला नेशनल कमेटी के उपाध्यक्ष भी रहे और सैकड़ों सामाजिक व शैक्षणिक समितियों से आजीवन जुड़े रहे।

वर्तमान में मांगीलाल रुंगटा के नाम से संचालित विद्यालय में हजारों छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सीताराम रुंगटा शंभू मंदिर चाईबासा, राजस्थान सेवा समिति, पिलाई टाउन हॉल, करणी मंदिर, सूरज मैन चैरिटेबल ट्रस्ट तथा स्वामी रूपानंद देश सेवा धर्म संस्थान (कोलकाता) के ट्रस्टी रहे। वे मारवाड़ी हिंदी विश्वविद्यालय चाईबासा, टाउन क्लब चाईबासा और शंभू मंदिर के मानद सचिव भी थे।

इसके अतिरिक्त वे छोटानागपुर एजुकेशन काउंसिल ऑफ इंडिया, मारवाड़ी फेडरेशन, बिहार बैडमिंटन एसोसिएशन, अभियंता एसोसिएशन ऑफ इंडिया सहित अनेक संस्थाओं के आजीवन सदस्य रहे। उन्हें रोटरी इंटरनेशनल द्वारा पॉल हैरिस फेलो एवं सिल्वर एलीफेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। कर्मयोगी सीताराम रुंगटा का जीवन आज भी समाज सेवा, सुशासन और नैतिक नेतृत्व की मिसाल के रूप में स्मरण किया जाता है।

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