पौने चार करोड़ की 6 परियोजनाओं की फाइलें 9 माह से अटकी, सरयू राय ने मंत्री को लिखा पत्र

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Jamshedpur:जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की आधारभूत संरचना से जुड़ी छह महत्वपूर्ण परियोजनाएँ बीते नौ माह से प्रशासनिक स्वीकृति के अभाव में विभागीय मुख्यालय में लंबित पड़ी हैं। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग ₹3 करोड़ 62 लाख 35 हजार 250 रुपये है। अब इस देरी को गंभीर मानते हुए जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सुदिव्य सोनू को पत्र लिखकर शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया है।
विधायक सरयू राय ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि सभी छह परियोजनाओं को तकनीकी स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है और अब केवल प्रशासनिक स्वीकृति की औपचारिकता शेष है। इसके बावजूद इतने लंबे समय तक फाइलों का लंबित रहना न केवल आश्चर्यजनक है, बल्कि क्षेत्र की जनता के हितों के साथ अन्याय भी है।
पत्र के अनुसार, वार्ड संख्या 9 में चार आरसीसी नाली निर्माण परियोजनाएँ अटकी हुई हैं। इनमें जवाहर नगर रोड संख्या-6 में कुटकुटडुंगरी से उलीडीह खनका तक नाली निर्माण (₹71.92 लाख), मिथलेश के घर से डिमना मेन रोड तक नाली निर्माण (₹35.55 लाख), सिंह जी के घर से दरभंगा डेयरी तक नाली निर्माण (₹71.45 लाख) तथा रामकृष्ण कॉलोनी से कंचन गैस एजेंसी तक आरसीसी नाली निर्माण (₹68.72 लाख) शामिल हैं।
इसके अलावा वार्ड संख्या 10 में मून सिटी के पास वृद्ध नागरिकों के लिए शेल्टर होम (₹28.13 लाख) और मानगो नगर निगम कार्यालय भवन के समीप जी+2 भवन निर्माण (₹86.55 लाख) की परियोजना भी प्रशासनिक स्वीकृति के इंतजार में रुकी हुई है।
सरयू राय ने पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि इनमें से चार परियोजनाएँ सीधे तौर पर जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी हैं। पिछले मॉनसून में देशबंधु लाइन समेत कई इलाकों में लंबे समय तक जलजमाव की समस्या रही थी। ऐसे में अगले मॉनसून से पहले इन कार्यों को पूरा करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं के लिए विभाग से किसी अतिरिक्त निधि की मांग नहीं की गई है। मानगो नगर निगम के पास पहले से ही आवश्यक राशि उपलब्ध है। बावजूद इसके नौ महीने तक फाइलों का लंबित रहना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
विधायक ने मंत्री को आगाह करते हुए लिखा है कि मानगो नगर निगम चुनाव की घोषणा किसी भी समय हो सकती है। आचार संहिता लागू होने की स्थिति में इन परियोजनाओं की स्वीकृति और अधिक समय तक अटक सकती है, जिससे अगले मॉनसून से पहले इन्हें पूरा करने का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।

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