Jamshedpur:लौह नगरी जमशेदपुर में इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। 21 फरवरी को विश्व स्तर पर मनाए जाने वाले इस दिवस के अवसर पर मातृभाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की आवाज एक बार फिर बुलंद होगी। इसी कड़ी में झारखंड बंगभाषी समन्वय समिति अपने स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 22 फरवरी 2026 को एक भव्य कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है।
समिति की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में बताया गया कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और पहचान का मूल आधार है। समिति का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य की भाषा नीतियों के कारण बंगला सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं का अस्तित्व संकट में है।
भाषा नीति पर सवाल
समिति पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि झारखंड में सैकड़ों बंगला माध्यम विद्यालयों को हिंदी और अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किया जा रहा है। इससे बंगला भाषी विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर सीमित होता जा रहा है।
समिति ने वर्ष 2024 में केंद्र सरकार द्वारा जारी भाषा संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा सुनिश्चित करने की बात तो की गई, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका समुचित पालन नहीं हो रहा है।
22 फरवरी को विशेष व्याख्यान
22 फरवरी 2026 को आयोजित विशेष कार्यक्रम में बंगला भाषा के महान समाज सुधारक और शिक्षाविद् ईश्वर चंद्र विद्यासागर के योगदान पर विस्तृत व्याख्यान होगा। मुख्य वक्ता के रूप में विद्यासागर के विचारों के प्रखर अध्येता एवं पश्चिम बंगाल वाममोर्चा के चेयरमैन विमान बोस उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम में विभिन्न भाषाई संगठनों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे और मातृभाषा संरक्षण के समर्थन में अपने विचार रखेंगे।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजेगा मंच
आयोजन को सांस्कृतिक रंग देने के लिए टैगोर स्कूल ऑफ आर्ट्स की श्रीमती चंदना चौधुरी और उनकी टीम द्वारा विशेष संगीत प्रस्तुति दी जाएगी। कार्यक्रम में बंगला सहित अन्य भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक झलक देखने को मिलेगी।
समिति की अपील
प्रेस वार्ता में समिति के अध्यक्ष बिकाश मुखर्जी, महासचिव संदीप सिन्हा चौधरी सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में भाषा प्रेमियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर मातृभाषा संरक्षण के इस अभियान को सशक्त बनाएं।
मातृभाषा दिवस का यह आयोजन न केवल बंगला भाषियों के लिए, बल्कि सभी भाषाई समुदायों के लिए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर साबित होगा।









