Jamshedpur : केबुल टाउन क्षेत्र मैं वेंडर के माध्यम से बिजली आपूर्ति के मामले पर उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर, विधायक सरयू राय ने संभाला मोर्चा

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Jamshedpur : केबुल टाउन क्षेत्र के निवासियों के घरों में टाटा स्टील के द्वारा नौ वेंडरों के माध्यम से बिजली की पूर्ति की जा रही है. इस वजह से क्षेत्र के लोगों को 25 से 30 प्रतिशत अधिक दर पर बिल का भुगतान करना पड़ रहा है. क्षेत्र के सभी घरों में सीधा कनेक्शन देने को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई है, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है. साथ ही दिवालिया केबुल कंम्पनी के आरपी याचिका में निहित बिन्दुओं का जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है. झारखंड सरकार और टाटा स्टील के अधिवक्ताओं ने भी याचिका का समर्थन किया. यह जानकारी जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने दी. वह गुरुवार को बिष्टुपुर स्थित अपने आवासीय कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. श्री राय ने बताया कि आगामी 10 जून को ग्रीष्मावकाश के बाद न्यायालय खुलने पर मामले की सुनवाई होगी. टाटा स्टील के वकील ने कहा कि कंपनी केबुल टाउन के सभी घरों में बिजली का सीधा कनेक्शन देने पर सहमत हैं, परंतु दिवालिया घोषित हो चुकी केबुल कंपनी के आरपी इसके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दे रहे हैं.

टाटा स्टील को दिवालिया केबुल कंपनी के आरपी से अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगने की कोई जरूरत नहीं

विधायक सरयू राय ने कहा कि टाटा स्टील को दिवालिया केबुल कंपनी के आरपी से अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगने की कोई जरूरत नहीं है. इस अनापत्ति के चक्कर में केबुल टाउन वासियों को कई वर्षों से बेवजह परेशानी उठानी पड़ रही है और महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के विद्युत आपूर्ति संहिता में किए गए प्रावधान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ‘विद्युत आपूर्ति के लाईसेंस धारी को अपने क्षेत्रों के सभी घरों को विद्युत कनेक्शन देना होगा. भले ही गृहस्वामी के पास निवास के मालिकाना हक अथवा किसी भी प्रकार का आवासीय प्रमाण हो अथवा नहीं.’ विद्युत अधिनियम की धारा- 43 में भी इस बारे में स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी घर वासी को बिजली कनेक्शन देने से इंकार नहीं किया जा सकता.

पूर्व में एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय दे चुका है आदेश

इस बारे में एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय आदेश का हवाला देते हुए विधायक श्री राय ने खा कि लाइसेंसी प्राधिकार गृहस्वामी अथवा निवासी को विद्युत कनेक्शन देने के लिये बाध्य है. जब सर्वोच्च न्यायालय, विद्युत अधिनियम एवं विद्युत नियामक आयोग के निर्देश इतना स्पष्ट हैं तब जमशेदपुर के विद्युत लाइसेंसी टाटा स्टील की कंपनी टीएसयूआईएल को केबुल टाउन इलाका के घरों में बिजली का अलग कनेक्शन नहीं देकर इसके लिए दिवालिया केबुल कंपनी के आरपी से अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगने का कोई औचित्य नहीं है. टाटा स्टील से क्षेत्र में सीधे बिजली की आपूर्ति करने की मांग करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि रिट याचिका की सुनवाई के बाद झारखंड उच्च न्यायालय से भी इसी आशय का निर्णय आएगा. तब कंपनी के पास घरों को सीधा बिजली कनेक्शन देनेके सिवाय कोई चारा नहीं रहेगा.

उपभोक्ताओं से तय दर से अधिक शुल्क कि वसूली

सरयू राय ने बताया कि विद्युत नियामक आयोग के अनुसार यदि कोई लाइसेंसी किसी वेंडर या अन्य संस्था के माध्यम से घरों को बिजली देता है तो इसके लिए वेंडर निर्धारित विद्युत दर के 5 प्रतिशत से अधिक सेवा शुल्क नही वसूल सकता. परंतु केबुल टाउन क्षेत्र के वेंडर उपभोक्ताओं से काफी अधिक शुल्क वसूल रहे हैं और इसे अपने प्राप्ति रसीद पर अंकित भी कर रहे हैं. कंपनी से 5.85 रुपये यूनिट से प्राप्त बिजली के बदले वे उपभोक्ताओं से 7.25 रुपये यूनिट शुल्क लिया जा रहा है. इसके अतिरिक्त कही 60 रूपये और कही 100 रूपये फिक्सड चार्ज भी लिया जा रहा है. जबकि सुविधाएं नगण्य हैं. हर रोज लोड बढ़ने से अक्सर ट्रिपिंग होते रहती है. मरम्मत कार्य के लिए उपभोक्ताओं को अलग भुगतान करना पड़ता है.
उपर्युक्त के आलोक में टाटा स्टील को केबुल टाउन इलाके में घरों को सीधे बिजली कनेक्शन देकर उच्च न्यायालय को सूचित कर देना चाहिए.

टाटा स्टील के वीपीसीएस से वार्ता के बाद भी शुरू नहीं हुई नालों की सफाई

दूसरी ओर आगामी बरसात को देखते हुए विधायक सरयू राय ने कहा कि 11 से 13 जून के बीच झारखंड में मानसून प्रवेश कर सकता है. टाटा स्टील के वीपीसीएस के साथ क़रीब दो माह पहले हुई वार्ता में मैंने उनसे निवेदन किया था और वे सहमत भी हुए थे कि जमशेदपुर के बड़े नालों की उडाही मानसून के पहले कर दी जाएगी. इसी तरह की बात मैंने जेएनएसी के अधिकारियों से भी कहते रहता हूं. जेएनएसी और टीएसयूआईएल से आग्रह है कि वे संयुक्त अभियान चलाकर जमशेदपुर के बड़े-छोटे नालों की शीघ्र सफ़ाई करा दें, ताकि आगामी बरसात के मौसम में मुहल्लों में जल जमाव नहीं हो तथा नाले का पानी बस्तियों में नही ठेला जाए. जमशेदपुर के लिए नाला आधारित विकास योजना लागू करना अति आवश्यक है.

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