Jamshedpur : गोविंदपुर जलापूर्ति योजना में भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खोलते हुए जिला परिषद सदस्य डॉ. परितोष सिंह ने शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभाग की उदासीनता यूं ही बनी रही तो यह जनकल्याणकारी योजना जल्द ही पूरी तरह से ठप हो जाएगी।
डॉ. परितोष ने बताया कि वर्ष 2015 में शुरू हुई योजना आज 2025 में भी अधूरी है, और सैकड़ों बस्तियों में अभी तक जलापूर्ति नहीं हो पाई है। वर्ल्ड बैंक के सहयोग से बनी यह योजना शुरुआत से ही भ्रष्टाचार की शिकार रही है।
मुख्य बिंदु जिन पर जताई गई चिंता:
1. भुगतान में देरी:
योजना के संचालन का जिम्मा मेसर्स जेमिनी एंटरप्राइजेस को वर्ष 2026 तक के लिए दिया गया है। बीते 27 महीनों से कंपनी कार्यरत है, लेकिन विभाग ने सिर्फ 10 माह का भुगतान किया है। 17 माह के बकाया भुगतान के कारण कंपनी दो बार जलापूर्ति रोक चुकी है, जिससे 21 पंचायतों में लाखों लोग प्रभावित हुए हैं।
2. MVWSC कमिटी निष्क्रिय:
जल कर वसूली और कनेक्शन मेंटेनेंस के लिए बनी MVWSC कमिटी में मुखिया और जल सहिया को रखा गया है, लेकिन यह कमिटी केवल बैठक तक सीमित रह गई है। कुछ पंचायतों में जल सहिया ने कार्य भी छोड़ दिया है।
3. पाइपलाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर की बदहाली:
कई स्थानों पर मुख्य पाइपलाइन फटने से जल बर्बाद हो रहा है और सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इंटक वेल में 15 फीट तक मिट्टी जमा है, जिससे मोटर बार-बार खराब हो रही है। बीते 5 वर्षों में जल टंकी की सफाई तक नहीं हुई है।
4. पारदर्शिता की कमी:
पहले कनेक्शन शुल्क के रूप में 450 रुपये लिए गए थे, लेकिन कई पंचायतों में इसका कोई हिसाब नहीं है। जल कर वसूली भी प्रभावी नहीं है।
डॉ. परितोष सिंह ने दिए समाधान के सुझाव:
1. गोविंदपुर योजना का संचालन JUSCO को सौंपा जाए, जैसा कि मोहरदा, घोड़ाबंधा, और मानगो में किया गया है।
2. MVWSC कमिटी में जनप्रतिनिधियों और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को शामिल किया जाए।
3. संवेदक को बकाया भुगतान कर इंटक वेल, टंकी की सफाई और पाइपलाइन की मरम्मत युद्धस्तर पर कराई जाए।
4. प्रत्येक उपभोक्ता को कस्टमर नंबर दिया जाए और ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा शुरू की जाए।
डॉ. परितोष ने कहा कि इन सभी समस्याओं को लेकर वे बहुत जल्द उपायुक्त से मुलाकात कर स्थायी समाधान की मांग करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जल जैसी बुनियादी सेवा को लेकर जनता के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।









