Jamshedpur : रेल सिविल डिफेंस द्वारा इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षणार्थी लोको पायलटों के लिए आपदा प्रबंधन एवं अग्नि सुरक्षा से संबंधित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान आग लगने पर त्वचा के जलने की गंभीरता का वर्गीकरण, प्राथमिक उपचार, “रूल ऑफ नाइन” तथा मुआवजा मूल्यांकन की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण की शुरुआत रेल सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने की। उन्होंने लोको पायलटों को अपने कर्तव्यों के प्रति राष्ट्रीय भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया और आपदा के समय तत्परता से सेवा देने की शपथ दिलाई।
प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने जलने की चार अवस्थाओं—फर्स्ट, सेकंड, थर्ड और फोर्थ डिग्री बर्न—की पहचान एवं उपचार के बारे में विस्तार से बताया। फर्स्ट डिग्री बर्न में त्वचा के लाल होने, सेकंड डिग्री में फफोले एवं तेज दर्द, थर्ड डिग्री में त्वचा की परतों के नष्ट होने तथा फोर्थ डिग्री में मांसपेशियों व हड्डियों तक क्षति पहुंचने की जानकारी दी गई।
उन्होंने प्राथमिक उपचार के तहत बताया कि फर्स्ट डिग्री बर्न में प्रभावित हिस्से को 10 से 15 मिनट तक ठंडे पानी में रखना चाहिए, जबकि सेकंड डिग्री बर्न में एंटीबायोटिक क्रीम लगाकर साफ पट्टी बांधनी चाहिए। वहीं थर्ड और फोर्थ डिग्री बर्न की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचाना आवश्यक होता है।
इसके साथ ही “रूल ऑफ नाइन” के माध्यम से शरीर के जले हुए हिस्से का प्रतिशत निर्धारित करने एवं 40 प्रतिशत से अधिक जलने की स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया गया, जिसके आधार पर मुआवजे का निर्धारण किया जाता है।
प्रशिक्षण पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से डिजिटल बोर्ड पर दिया गया। द्वितीय सत्र में डेमोंस्ट्रेटर शंकर कुमार प्रसाद द्वारा फायर उपकरणों के उपयोग, सीपीआर, हेमलिच मेन्युवर, टो ड्रैग, ब्लैंकेट ड्रैग तथा मैन-मेड स्ट्रेचर तैयार करने की विधि का मॉक ड्रिल कराकर प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर, खड़गपुर, रांची और आद्रा मंडल के करीब 200 लोको पायलट एवं ट्रेनिंग सेंटर के अनुदेशक उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के अंत में लोको पायलटों ने सिविल डिफेंस टीम द्वारा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से दिए गए इस उपयोगी प्रशिक्षण की सराहना की।











