नोआमुंडी में अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर ‘सबल’ ने दिया समानता और सम्मान का संदेश

Share करें

✓ Link copy हो गया!



Noamundi : जब आवाज साथ नहीं देती, तो हाथों के संकेत संवाद की ताकत बन जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर नोआमुंडी में टाटा स्टील फाउंडेशन के ‘सबल’ कार्यक्रम के तहत आयोजित विशेष सामुदायिक आयोजन ने इसी संदेश को प्रभावी ढंग से सामने रखा। कार्यक्रम में बधिर बच्चों, अभिभावकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और समुदाय के प्रतिनिधियों समेत 172 लोगों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना नहीं, बल्कि बधिर व्यक्तियों के अधिकार, सम्मान और समान अवसर को लेकर समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाना भी रहा। ‘सबल’ के माहव्यापी जागरूकता अभियान के तहत नोआमुंडी, जगन्नाथपुर और जोड़ा के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में भी कई गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनसे करीब 1,138 लोग जुड़े।

बधिर विद्यार्थियों ने सिखाए सांकेतिक भाषा के संकेत

कार्यक्रम के दौरान बधिर विद्यार्थियों ने प्रतिभागियों को भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) के बुनियादी संकेत, अभिवादन और वर्णमाला की जानकारी दी। सांकेतिक भाषा में आयोजित क्विज ने भी प्रतिभागियों में खासा उत्साह पैदा किया।

प्रोजेक्ट गर्ल्स स्कूल के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से विविधता और समानता का संदेश दिया। वहीं, नोआमुंडी इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए बधिर व्यक्तियों और उनके परिवारों के सामने आने वाली सामाजिक चुनौतियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की पहचान नहीं है, बल्कि उसकी क्षमता और प्रतिभा ही उसकी वास्तविक पहचान है।

कार्यक्रम के समापन पर बधिर विद्यार्थियों ने केक काटकर अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाया। प्रेरणा समिति की प्रतिनिधि अभिश्वेता त्रिपाठी ने सांकेतिक भाषा सीखने के अनुभव को समुदाय के साथ बेहतर और सार्थक संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम में डॉ. मनोजित बिस्वास समेत विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, सामुदायिक कार्यकर्ता, अभिभावक और बधिर विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Leave a Comment

The specified slider id does not exist.