Jamshedpur : झारखंड के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने सेवानिवृत्ति अथवा सेवा विस्तार की अवधि समाप्त होने के बाद भी अधिकारियों से सरकारी कार्य लेने पर रोक लगा दी है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) और वन क्षेत्र पदाधिकारियों (रेंजर) से तत्काल कोई सरकारी कार्य नहीं लिया जाए और न ही उन्हें किसी प्रकार का भुगतान किया जाए।
अपर सचिव भानु चौधरी ने पीसीसीएफ, झारखंड को पत्र भेजकर सभी एपीसीसीएफ, सीसीएफ, आरसीसीएफ, वन संरक्षक और डीएफओ को आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सेवा विस्तार खत्म होने के बाद भी काम लेने की शिकायत
विभाग के अनुसार, लगातार ऐसी शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि सेवा विस्तार की अवधि समाप्त होने के बाद भी कुछ अधिकारियों से विभागीय कार्य लिए जा रहे हैं। कुछ मामलों में अधिकारियों द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल की शिकायत भी सामने आई थी।
विभाग ने ऐसी व्यवस्था को नियमों के विपरीत बताते हुए भ्रष्टाचार, सरकारी धन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग की आशंका जताई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सक्षम स्तर से अनुमति प्राप्त किए बिना किसी सेवानिवृत्त अधिकारी से सरकारी कार्य नहीं लिया जाएगा।
मानगो-दलमा क्षेत्र के दो रेंजर भी चर्चा में
विभागीय आदेश के बाद मानगो-दलमा क्षेत्र में रेंजर दिविजय सिंह और दिनेश चंद्रा की भूमिका भी चर्चा में है। दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों की सेवा अवधि समाप्त होने के बाद भी विभागीय एवं वित्तीय कार्यों के संचालन को लेकर सवाल उठे हैं।
बताया गया है कि दिविजय सिंह को दो बार सेवा विस्तार मिल चुका है और वे तीसरे सेवा विस्तार की प्रतीक्षा में हैं, जबकि दिनेश चंद्रा को एक बार सेवा विस्तार दिया जा चुका है।
दलमा रिजॉर्ट विवाद से भी जुड़ा मामला
दलमा क्षेत्र में बने एक रिजॉर्ट को लेकर पूर्व में सामने आए विवाद के कारण भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिजॉर्ट के निर्माण, वन क्षेत्र में गतिविधियों, विभागीय अनुमति और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर पहले सवाल उठ चुके हैं।
विभाग के ताजा आदेश के बाद अब यह भी जांच का विषय बन सकता है कि सेवा विस्तार समाप्त होने के बाद संबंधित अधिकारियों को किस आधार पर विभागीय अथवा वित्तीय कार्यों में भूमिका निभाने की अनुमति मिली थी और उस अवधि में उनके पास कितने प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार थे।
विभागीय आदेश के बाद मानगो-दलमा क्षेत्र में संबंधित अधिकारियों की भूमिका तथा सेवा विस्तार समाप्त होने के बाद लिए गए निर्णयों की समीक्षा की संभावना भी बढ़ गई है।

















