Jamshedpur : बिरसानगर स्थित आस्था ट्विन सिटी में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन आचार्य श्री प्रसन्ना शास्त्री जी ने ज्ञान और भक्ति के अद्भुत समन्वय का वर्णन किया। कथा के दौरान उद्धव और गोपियों के संवाद का भावपूर्ण प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
आचार्य ने बताया कि कंस के बुलावे पर कृष्ण के वृंदावन से मथुरा जाने और कंस वध के बाद नंद बाबा आदि के वृंदावन लौटने के प्रसंग के बीच कृष्ण ने गोपियों के प्रेम और विरह को समझते हुए उद्धव जी को वृंदावन भेजा। ज्ञान के अभिमान से भरे उद्धव जब गोपियों के निष्काम प्रेम और अनन्य भक्ति से रूबरू हुए तो उनका सारा अहंकार समाप्त हो गया।
उन्होंने गोपियों की कृष्ण के प्रति समर्पित भक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि उद्धव स्वयं इस प्रेम से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि यदि उन्हें पुनर्जन्म लेना पड़े तो वृंदावन की लता-पता बनें, ताकि गोपियों के चरणों की रज उन्हें प्राप्त हो सके।
कथा के दूसरे चरण में आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह का मनोहारी प्रसंग सुनाया। संगीत एवं भजनों से सजे कार्यक्रम में श्रद्धालु देर तक झूमते रहे और वातावरण भक्तिमय बना रहा।

















