Jamshedpur : मानगो के पुरुलिया रोड निवासी एवं पूर्व छात्र नेता जाकिर अली की हाल में हुई मौत को लेकर निष्पक्ष और गहन जांच की मांग उठने लगी है। प्रथम दृष्टया मामले को आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन परिजनों और परिचितों ने घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए पुलिस से वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक तरीके से जांच कराने का आग्रह किया है।
इस संबंध में वरीय पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर आजादनगर थाना पुलिस को मामले के सभी संभावित पहलुओं की जांच का निर्देश देने की मांग की गई है। आवेदनकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि जाकिर अली की मौत की वास्तविक वजह सामने लाना और परिवार को न्याय दिलाना है।
अच्छे तैराक थे जाकिर, मौत की परिस्थितियों पर सवाल
आवेदन में बताया गया है कि करीब एक सप्ताह पूर्व मानगो क्षेत्र के लक्ष्मण नगर के समीप एक व्यक्ति के नदी में डूबने अथवा शव मिलने की सूचना सामने आई थी। बताया गया कि नदी के बहाव के कारण शव मोहरदा क्षेत्र की ओर चला गया और बाद में बिरसानगर थाना क्षेत्र में बरामद किया गया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, परिवार और लंबे समय से जाकिर अली को जानने वाले लोगों का कहना है कि वह अच्छे तैराक थे। आवेदन में वर्ष 2009 से जाकिर और उनके परिवार से परिचित होने तथा छुट्टियों के दौरान डिमना लेक में उनके लंबे समय तक तैरने का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में नदी में डूबकर आत्महत्या किए जाने की संभावना को लेकर परिचितों के मन में सवाल पैदा हुए हैं।
शरीर पर चोट के निशान की वैज्ञानिक जांच की मांग
आवेदनकर्ताओं ने विभिन्न मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए शव की आंख के पास चोट अथवा जख्म और चेहरे पर चोट के निशान होने की बात कही है। हालांकि, इन दावों की वास्तविक स्थिति पोस्टमार्टम एवं चिकित्सकीय रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगी।
उन्होंने मांग की है कि यदि पोस्टमार्टम में किसी प्रकार की चोट के निशान सामने आते हैं, तो उनकी प्रकृति, कारण और समय की फॉरेंसिक जांच कराई जाए। साथ ही पोस्टमार्टम, विसरा एवं अन्य चिकित्सकीय रिपोर्टों की विस्तृत समीक्षा की जाए।
मोबाइल, CDR और अंतिम संपर्कों की जांच
एसएसपी को दिए आवेदन में जाकिर अली के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), चैट, मैसेज और अंतिम संपर्कों की नियमानुसार जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा मौत से पहले उनकी गतिविधियों, अंतिम लोकेशन और संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटाने का आग्रह किया गया है।
वाहन और CCTV फुटेज भी जांच के दायरे में हों
आवेदनकर्ताओं ने जाकिर के ऑटो अथवा वाहन की तकनीकी एवं फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह पता लगाने का आग्रह किया गया है कि वह अंतिम बार वाहन लेकर कहां गए थे और उस दौरान उनके साथ कौन-कौन लोग थे।
घटना स्थल और आसपास के क्षेत्रों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने की भी मांग की गई है, ताकि उनकी अंतिम गतिविधियों और आने-जाने के रास्ते की जानकारी सामने आ सके।
शव मिलने वाले स्थान का दोबारा निरीक्षण कराने की मांग
शिकायतकर्ताओं ने कथित घटनास्थल और शव बरामद होने वाले स्थान का दोबारा बारीकी से निरीक्षण कराने का आग्रह किया है। आवश्यकता पड़ने पर फॉरेंसिक टीम की सहायता लेने की बात कही गई है।
उन्होंने नदी के बहाव, कथित घटना स्थल से शव बरामद होने वाले स्थान की दूरी तथा अन्य परिस्थितियों का वैज्ञानिक विश्लेषण कराने की मांग की है, ताकि घटनाक्रम की पूरी कड़ी स्थापित हो सके।
किसी पर आरोप नहीं, सिर्फ सच्चाई सामने लाने की मांग
आवेदनकर्ताओं ने कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं लगा रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि जाकिर अली की मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच हो। यदि जांच में आत्महत्या की पुष्टि होती है तो उपलब्ध वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट निष्कर्ष सामने आए। वहीं, यदि किसी आपराधिक संलिप्तता अथवा संदिग्ध परिस्थिति का पता चलता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
परिजनों और परिचितों ने पुलिस प्रशासन से मामले को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ लेते हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा, फॉरेंसिक साक्ष्य, CCTV फुटेज और मोबाइल रिकॉर्ड समेत सभी उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि हर पहलू की निष्पक्ष जांच के बाद ही जाकिर अली की मौत की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।
















