मानसून फिर हुआ सक्रिय, उत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट; कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी

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नई दिल्ली। देशभर में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से उत्तर, मध्य और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की गई। छत्तीसगढ़ और मेघालय में 21 सेंटीमीटर तक वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि पंजाब, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कई इलाकों में भी भारी से बहुत भारी बारिश हुई। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा में भी अच्छी वर्षा दर्ज की गई।

आईएमडी का अनुमान है कि आगामी दिनों में उत्तर भारत में मानसून और अधिक सक्रिय रहेगा। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश का भी पूर्वानुमान है, जिससे भूस्खलन और जलभराव जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

बारिश के साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कई स्थानों पर वज्रपात की भी आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

वहीं मध्य भारत में भी अगले छह से सात दिनों तक मानसून सक्रिय रहने के संकेत हैं। पश्चिमी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में मध्यम से अच्छी बारिश होने की संभावना है। हालांकि दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में फिलहाल बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां अगले सप्ताह तक बनी रह सकती हैं।

इधर, जुलाई का आधे से अधिक महीना बीतने के बावजूद उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका असर खेती-किसानी पर भी पड़ने लगा है। खरीफ फसलों की बुवाई करीब 16 प्रतिशत पीछे चल रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। हालांकि राहत की बात यह है कि देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर फिलहाल संतोषजनक बना हुआ है।

मौसम विभाग को उम्मीद है कि 20 से 30 जुलाई के बीच उत्तर और मध्य भारत में मानसून फिर पूरी तरह सक्रिय होगा, जिससे वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। ऐसे में किसानों के साथ-साथ आम लोगों की निगाहें अब सावन की झमाझम बारिश पर टिकी हैं।

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