Chaibasa :पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा क्षेत्र के करमपदा गांव की एक नाबालिग किशोरी से जुड़े बाल श्रम का गंभीर मामला सामने आया है, जिसका तार ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के बंडामुंडा से जुड़ा हुआ है।
जानकारी के अनुसार, 22 अप्रैल को बंडामुंडा स्थित रेलवे कॉलोनी के एक क्वार्टर से 12 वर्षीय आदिवासी बच्ची को बाल श्रमिक के रूप में बरामद किया गया। हैरानी की बात यह है कि घटना के लगभग 12 दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, बच्ची के उद्धार के बाद भी श्रम विभाग ने मामले की जांच शुरू नहीं की है, वहीं Child Welfare Committee (CWC) की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है।
पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि एक रेलकर्मी और उसकी पत्नी उससे दिनभर घरेलू काम कराते थे और उसे पर्याप्त भोजन भी नहीं दिया जाता था। यह मामला न केवल बाल श्रम, बल्कि मानवाधिकारों और बाल संरक्षण कानूनों के गंभीर उल्लंघन को दर्शाता है।
झारखंड के आदिवासी समुदाय से संबंध रखने वाली इस बच्ची का मामला संवेदनशील हो गया है। इस पर सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
लोगों ने मांग की है कि आरोपी रेलकर्मी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और पीड़ित बच्ची को शीघ्र न्याय दिलाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।











