बर्मामाइंस लकड़ी टाल में रेलवे का अतिक्रमण हटाओ अभियान, विरोध के बीच दो गोदाम व एक मकान ध्वस्त

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Jamshedpur : शहर के बर्मामाइंस स्थित लकड़ी टाल क्षेत्र में मंगलवार को रेलवे प्रशासन ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। रेलवे की जमीन को खाली कराने के उद्देश्य से चलाए गए इस अभियान में रेलवे इंजीनियरिंग विभाग, Railway Protection Force (आरपीएफ), जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम शामिल रही। सुबह से ही इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी।

बताया गया कि रेलवे प्रशासन ने पूर्व में ही क्षेत्र के निवासियों और व्यवसाय संचालकों को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद कई लोगों द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाने पर मंगलवार को कार्रवाई की गई।

हालांकि अभियान निर्धारित समय से करीब डेढ़ घंटे की देरी से शुरू हुआ, जिसका कारण सुरक्षा बल के जवानों का देर से पहुंचना बताया गया। इसके बाद अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेकर रणनीति बनाई और सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होने के बाद जेसीबी मशीनों से कार्रवाई शुरू की गई।

कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने विरोध जताया। वर्षों से वहां रह रहे परिवारों और व्यवसायियों ने अचानक कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए समय की मांग की, ताकि वे अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ले जा सकें। मौके पर मौजूद दंडाधिकारी और पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया।

काफी समझाइश के बाद कुछ लोगों ने रेलवे परियोजनाओं को देखते हुए स्वयं जमीन खाली करने का आश्वासन दिया, लेकिन प्रशासन ने तय योजना के अनुसार अभियान जारी रखा। इस दौरान दो बड़े गोदाम और एक मकान को ध्वस्त कर दिया गया। जेसीबी की कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

अभियान के दौरान बर्मामाइंस थाना की पुलिस समेत दर्जनों सुरक्षाकर्मी तैनात रहे और पूरे इलाके की घेराबंदी की गई, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, टाटानगर स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में विकास एवं विस्तार की कई योजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनके लिए अतिक्रमण हटाना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे की जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे भी इस तरह के अभियान जारी रहेंगे।

वहीं स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास की व्यवस्था पर विचार करने की मांग की है। फिलहाल इस मुद्दे पर रेलवे की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।

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