Jamshedpur:विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार में सरयू राय ने झारखंड के प्रमुख शहरों—जमशेदपुर, धनबाद और रांची—में नदियों के रिवर बेड पर बढ़ते अतिक्रमण को गंभीर जल संकट का मुख्य कारण बताया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है।
सेमिनार का आयोजन IIT (ISM) Dhanbad, युगांतर भारती, नमामि गंगे, केंद्रीय भूजल बोर्ड, CSIR, LiFE Mission और मिशन Y के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
अपने संबोधन में सरयू राय ने कहा कि इन शहरों में नदियों के रिवर बेड पर बड़े पैमाने पर मकान और निर्माण कार्य हो चुके हैं, जिससे जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है। उन्होंने इसे “विनाश की ओर बढ़ता कदम” बताते हुए कहा कि यह स्थिति भविष्य में गंभीर जल संकट को जन्म देगी।
सेमिनार में प्रो. आरके सिन्हा, प्रो. अंशुमाली और अंशुल शरण ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि औद्योगिक गतिविधियों, तटबंध निर्माण और अनियंत्रित अतिक्रमण के कारण नदियों और भूजल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि छोटी नदियां धीरे-धीरे समाप्ति की कगार पर हैं और यदि संरक्षण के ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण के लिए सबसे जरूरी कदम अतिक्रमित भूमि को नदियों को वापस करना है। इसके बिना जल संकट का समाधान संभव नहीं है।
कार्यक्रम में देशभर से आए पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों ने पेपर प्रेजेंटेशन और व्याख्यान के माध्यम से जल संसाधन प्रबंधन, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर गहन चर्चा की।
सोमवार को सेमिनार में राजेंद्र सिंह (मैगसेसे पुरस्कार विजेता) सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा करेंगे।








