Jamshedpur : Shri Shri Sheetla Mata Temple में चैत्र नवरात्रि ज्वारा महोत्सव के तहत बुधवार को पारंपरिक ‘बिरीह भिगोना’ की रस्म विधिवत संपन्न हुई। कार्यक्रम की शुरुआत माता शीतला की पूजा-अर्चना के साथ की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार ज्योत प्रज्वलन से एक दिन पूर्व सात प्रकार के अनाज—गेहूं, जौ, उड़द, चना, मटर, मूंग और मसूर—को मिलाकर समाज के प्रमुख लोगों द्वारा मिट्टी के बड़े पात्र में पानी के साथ भिगोया गया। इस प्रक्रिया को ‘बिरीह भिगोना’ कहा जाता है।
मंदिर समिति के अनुसार गुरुवार सुबह इस भीगे हुए अनाज का खाद और मिट्टी के साथ रोपण किया जाएगा, वहीं शाम 4 बजे 23 अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाएंगी। मान्यता है कि इस परंपरा की शुरुआत भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव द्वारा की गई थी। ज्वारा के रंग से वर्षभर की समृद्धि और स्थिति का अनुमान लगाया जाता है—हरा और सफेद ज्वारा समृद्धि का संकेत देता है, जबकि पीले रंग की मिलावट चुनौतियों की ओर इशारा करती है।
बिरीह भिगोना के उपरांत स्थानीय जश गायन मंडली द्वारा भजन और जश गीतों की प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। ज्योत प्रज्वलन के बाद छत्तीसगढ़ से आई मंडली द्वारा नौ दिनों तक जश गायन कर मां की सेवा की जाएगी।
कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार सहित राजू गिरी, सूरज भदानी और अन्य कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।








