सही–गलत से परे, सवालों के मैदान में उतरी पीढ़ी: जमशेदपुर में  उठा जजमेंट-फ्री बदलाव का तूफान

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Jamshedpur:जमशेदपुर की धरती एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल की साक्षी बनी, जब पीपल फॉर चेंज, ComMutiny – The Youth Collective एवं vartaLaap Coalition के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित क्षेत्रीय संवाद  “Beyond Right & Wrong: Youth Leadership is Changing the Game”
ने यह साफ कर दिया कि आज का युवा नेतृत्व सही–गलत की पारंपरिक रेखाओं में नहीं बंधना चाहता।

जब जजमेंट की दीवारें गिरीं
कार्यक्रम का माहौल रूमी की उस प्रसिद्ध पंक्ति से आकार लेता दिखा—
“सही और गलत के विचारों से परे एक मैदान है,
मैं वहाँ तुमसे मिलूँगा।”
इसी भावना के साथ सामने आया ComMutiny का ‘5th Space’—
एक ऐसा सुरक्षित, जजमेंट-फ्री मंच जो परिवार, दोस्ती, शिक्षा और करियर से आगे जाकर युवाओं को खुद को समझने, सवाल पूछने और बदलाव रचने की आज़ादी देता है।

मुद्दे कठिन थे, बातचीत ईमानदार थी
संवाद में युवाओं, शिक्षकों और सिविल सोसाइटी संगठनों ने बिना झिझक उन विषयों पर बात की, जिनसे समाज अक्सर कतराता है—
वैज्ञानिक और समावेशी सेक्स एजुकेशन
LGBTQIA+ स्वीकृति और सुरक्षित स्पेस
ड्रग अब्यूज और मानसिक स्वास्थ्य
जाति-धर्म आधारित पूर्वाग्रह
जिला स्तर पर युवा मंचों की ज़रूरत
जजमेंट-फ्री, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
यह चर्चा न तो उग्र थी, न ही सतही—
बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और समाधान-केंद्रित थी।

24 युवा, अनगिनत अनुभव
कार्यक्रम में शामिल 24 युवा प्रतिभागी
स्लम, ग्रामीण और परिनगरीय इलाकों से आए थे।
खेल, रंगमंच और सामुदायिक कार्यों से जुड़े इन युवाओं की बातों में
जमीनी हकीकत और भविष्य की स्पष्ट तस्वीर दोनों दिखीं।
KMPM कॉलेज, DBMS स्कूल और तारापोर स्कूल के शिक्षक-युवा,
साथ ही अन्वेषा NGO, आदर्श सेवा संस्थान और ग्रोथ ऑर्गेनाइजेशन की मौजूदगी ने संवाद को और गहराई दी।
सम्मान उन लोगों का, जो चुपचाप बदलाव लाते हैं
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और CSO सदस्यों का विशेष फेलिसिटेशन किया गया—
उनके लिए, जो रोज़ क्लासरूम और समुदायों में
सुरक्षित, जजमेंट-फ्री और समावेशी माहौल गढ़ते हैं।
चाहे LGBTQIA+ समावेशिता हो,
संवेदनशील विषयों पर खुला संवाद
या ड्रग अब्यूज से जूझते युवाओं के साथ खड़ा होना—
इन प्रयासों ने साबित किया कि असली बदलाव ज़मीन से शुरू होता है।

“युवाओं को केंद्र में रखना ही असली शिक्षा है”
तारापोर स्कूल (अग्रिको) की प्रिंसिपल श्रीमती ईशिता देय की बातों ने पूरे संवाद को आवाज़ दी—
“यह बातचीत 5th Space जैसी होनी चाहिए,
जहाँ युवा वास्तव में केंद्र में हों।
इस संवाद ने मुझे सिखाया कि युवाओं को केंद्र में रखना क्यों ज़रूरी है—
और अब मैं यही सोच अपने स्कूल में अपनाऊँगी।”
उनका यह संकल्प पूरे कार्यक्रम की आत्मा बन गया।
✦ चार्टर ऑफ डिमांड्स: युवाओं की साफ़ और मजबूत मांगें
संवाद के अंत में युवाओं ने चार्टर ऑफ डिमांड्स प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख मांगें शामिल रहीं—

स्कूलों में वैज्ञानिक, जाति-धर्म निरपेक्ष सेक्स एजुकेशन
LGBTQIA+ जागरूकता, सुरक्षित स्पेस और सेंसिटाइजेशन
ड्रग अब्यूज रोकथाम के लिए काउंसलिंग व स्कूल-आधारित कार्यक्रम
हर जिले में युवा काउंसिल/युवा प्लेटफॉर्म
जजमेंट-फ्री शिक्षा, डिजिटल व मानसिक स्वास्थ्य सहायता
सीमा-पार सीखने के अवसर
यह कोई शिकायत नहीं थी—
यह भविष्य का ब्लूप्रिंट था।

जमशेदपुर की आवाज़, अब राष्ट्रीय मंच पर
यह संवाद देश के 10 से अधिक राज्यों में चल रही राष्ट्रीय श्रृंखला का हिस्सा है।

सभी राज्यों से मिले सुझावों के आधार पर
एक राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया जाएगा,
जिसका समापन 27 फरवरी 2026, नई दिल्ली में होगा।
जमशेदपुर ने साफ कर दिया है—
युवा अब इंतज़ार नहीं कर रहे,
वे नेतृत्व कर रहे हैं।

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