Manoharpur:पश्चिम सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड में बहने वाली कोयना नदी इन दिनों गंभीर पर्यावरणीय खतरे का सामना कर रही है। नदी के दूरदूरी पुलिया के समीप मछली पकड़ने के नाम पर माइनिंग उत्खनन में प्रयुक्त विस्फोटक पदार्थों का इस्तेमाल कर बम ब्लास्ट किए जाने का मामला सामने आया है। यह न केवल कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी विनाशकारी साबित हो रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विस्फोट के जरिए मछली पकड़ने की इस खतरनाक गतिविधि में कोयना नदी से सटे दौतुंबा और गुचूड़ीह गांव के कुछ ग्रामीण मछुआरे कथित तौर पर शामिल हैं। विस्फोट के कारण नदी में मौजूद छोटी-बड़ी मछलियों के साथ-साथ अन्य जलीय जीव भी बड़ी संख्या में नष्ट हो रहे हैं। इससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और भविष्य में नदी की जैव विविधता पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।
चिंताजनक पहलू यह है कि इस अवैध गतिविधि की जानकारी स्थानीय स्तर पर होने के बावजूद अब तक संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासनिक चुप्पी के चलते आरोपितों का मनोबल बढ़ता जा रहा है और यह प्रवृत्ति क्षेत्र में कानून-व्यवस्था व जनसुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि विस्फोटक पदार्थों से मछली शिकार न केवल नदी के जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि आसपास के गांवों के लिए भी जोखिम पैदा करता है। ऐसे में आवश्यक है कि प्रशासन, खनन विभाग और मत्स्य विभाग समन्वय के साथ त्वरित जांच और कड़ी कार्रवाई करें, ताकि कोयना नदी को इस विनाश से बचाया जा सके।









