औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में नई पहल — सीआईआई झारखंड ने आयोजित किया ‘सेफ्टी टॉक 2025’ सम्मेलन सह प्रदर्शनी

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Jamshedpur : कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) झारखंड द्वारा दो दिवसीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी ‘सेफ्टी टॉक 2025’ का सफल आयोजन किया गया। समापन सत्र में करीब 300 प्रतिनिधि और 800 से अधिक आगंतुकों ने भाग लेकर कार्यस्थल सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और औद्योगिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा की।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभिन्न उद्योगों में सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ बनाना, कार्यस्थलों पर संभावित जोखिमों को न्यूनतम करना और कर्मचारियों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। विशेषज्ञ वक्ताओं ने साझा किया कि आधुनिक औद्योगिक परिदृश्य में सुरक्षा केवल प्रक्रिया नहीं, बल्कि संस्कृति का हिस्सा होनी चाहिए।


सत्र में वक्ताओं ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) में सुरक्षा को अक्सर उपेक्षित किया जाता है, जबकि यही दीर्घकालिक विकास की नींव है। मुख्य वक्ताओं में तपस साहू (सीईओ सह एमडी, हाइको इंजीनियर प्रा. लि.), बिस्वजीत जेना (आरबीएस ट्रांसमिशन), अमरजीत सिंह (अबरैस्ट इंजीनियरिंग) और हिमालया राजीव शुक्ला शामिल रहे। उन्होंने नियमित सुरक्षा ऑडिट, कार्यस्थल निरीक्षण और प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।



बड़े उद्योगों में सुरक्षा संस्कृति निर्माण की चुनौतियों और अवसरों पर यह सत्र केंद्रित रहा। उज्जल चक्रवर्ती (टिनप्लेट डिवीजन, टाटा स्टील लिमिटेड), जीएम सुरेश कुमार, और अभिजीत ऐन दास (हेड, सेफ्टी, टाटा पावर) ने साझा किया कि सुरक्षा नेतृत्व की प्रतिबद्धता और “वॉक द टॉक” सिद्धांत अपनाना अनिवार्य है।


मंसूर अहमद (डायरेक्टर आउटरीच-ईस्ट) और शुभार्ती विश्वविद्यालय के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा औद्योगिक सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने चेताया कि भारत में साइबर अपराध से अधिक साइबर फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। समाधान के रूप में उन्होंने जागरूकता और साइबर शिक्षा को सबसे प्रभावी उपाय बताया।


रोड सेफ्टी अवेयरनेस — व्यवहारिक परिवर्तन की जरूरत

सत्र में वक्ताओं ने बताया कि लगभग 80% सड़क दुर्घटनाएं मानव त्रुटियों के कारण होती हैं। नीरज सिन्हा (टाटा स्टील), उदित वर्मा (हेड सेफ्टी, रोड एंड रेल, टाटा स्टील लिमिटेड) और जहान ए. कोटवाल (डायरेक्टर, गुड माइंड प्रा. लि.) ने साझा किया कि अब एआई तकनीक आधारित थकान-डिटेक्शन सिस्टम और ड्राइवर अलर्ट ऐप्स सड़क सुरक्षा को नया आयाम दे रहे हैं।

प्रसिद्ध कोच एवं सलाहकार डेव ब्राइट ने “शून्य दुर्घटना मानसिकता” (Zero Incident Mindset) को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाले उद्योगों में प्रोएक्टिव एप्रोच, मजबूत सिस्टम डिज़ाइन और जोखिम जागरूकता से ही “जीरो इंसीडेंट” लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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