साहिबगंज: जिले में हर वर्ष आने वाली बाढ़ और उसके बाद होने वाले कटाव से जानमाल और जनजीवन को भारी क्षति पहुंचती है। ऐसा ही ताजा मामला उधवा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत दक्षिण पलाशगाछी पंचायत के तैमूर टोला का है, जहां बुधवार सुबह लगभग 8 बजे गंगा के तेज कटाव के चलते उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय का एक हिस्सा नदी में समा गया। इस भयावह घटना में विद्यालय के दो कक्षाएं पूरी तरह से ध्वस्त हो गईं हैं। उधर इस विद्यालय में 186 से अधिक बच्चे नामांकित हैं। जहां विद्यालय के सचिव मो. फैजुद्दीन शेख ने बताया कि यह दृश्य बेहद डरावना और हृदय विदारक था। जहां विद्यालय गंगा नदी के किनारे स्थित था, जहां पहले से ही कटाव का खतरा बना हुआ था। हालांकि, विद्यालय प्रशासन की सतर्कता से समय रहते जरूरी सामानों को परिसर से हटवा लिया गया था। उधर गंगा कटाव से कंप्यूटर रूम भी खतरे में है हालांकि कंप्यूटर रूम अभी तक सुरक्षित है, लेकिन कटाव की गति को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि यह कब तक सुरक्षित रह पाएगा। उधर सचिव फैजुद्दीन शेख ने आशंका जताई है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो पूरा विद्यालय गंगा में विलीन हो सकता है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश और चिंता
उधर इस तरह की घटना होने के बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। जहां कुछ स्थानीय लोगों ने आसपास के निवासियों को सतर्क करते हुए सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। वही स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार शिक्षा संस्थान का नष्ट हो जाना न केवल बच्चों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है, बल्कि प्रशासन की उदासीनता को भी उजागर करता है।
क्या कहते हैं बीईओ रॉबिन मंडल
वही मामले को लेकर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी रॉबिन मंडल ने दूरभाष पर जानकारी देते हुए बताया कि स्थिति गंभीर है। जहां उन्होंने विद्यालय के सचिव को निर्देशित किया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर बच्चों के पठन पाठन की व्यवस्था आसपास के सुरक्षित घरों में की जाए, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
स्थानीय मुखिया की अपील
वही दक्षिण प्लशगाछी पंचायत की मुखिया नफीसा खातून ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि शिक्षा का मंदिर इस तरह नदी में बह जाना हमारे भविष्य के लिए चिंताजनक है। आगे उन्होंने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द विद्यालय का पुनर्निर्माण इसी क्षेत्र में कहीं सुरक्षित स्थान पर किया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके। उधर यह घटना न केवल एक विद्यालय के ध्वस्त होने की कहानी है, बल्कि यह सवाल उठाती है कि कब तक बाढ़ और कटाव के नाम पर हमारे बच्चों का भविष्य यूं ही बहता रहेगा। अब समय आ गया है कि जिला प्रशासन स्थायी समाधान की ओर कदम बढ़ाए और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोके। वहीं इसके पूर्व में भी उक्त समस्या को लेकर खबर को प्रकाशित की गई, लेकिन प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की संज्ञान न लेना उदासीनता को उजागर करती है।









