Jamshedpur :जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को पत्र लिखकर एमजीएम अस्पताल के सुचारू संचालन और जनसुविधाओं की निगरानी के लिए एक सक्षम अनुश्रवण समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि समिति में स्थानीय सांसद और विधायक को भी शामिल किया जाए, ताकि अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही तय हो सके।
विधायक सरयू राय ने पत्र में लिखा है कि पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से अधूरे एमजीएम अस्पताल भवन का उद्घाटन मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर करा दिया गया था। इसके परिणामस्वरूप आज तक पुराने अस्पताल का सुचारू रूप से नए भवन में स्थानांतरण नहीं हो पाया है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर सक्षम समिति नहीं बनी तो पुरानी अव्यवस्थाएं नए भवन में भी स्थानांतरित हो जाएंगी।
पानी की समस्या बरकरार, घटिया नल और खराब आरओ बने परेशानी का कारण
सरयू राय ने अपने पत्र में लिखा कि अस्पताल में पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। उद्घाटन के बाद जल्दबाजी में पांच डीप बोरिंग कराई गईं, जिनसे अब तक जलापूर्ति की जा रही है — जो न केवल अपर्याप्त हैं, बल्कि भूगर्भ जल की गुणवत्ता भी खतरनाक स्तर की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल भवन का निर्माण करने वाली एलएंडटी कंपनी ने घटिया गुणवत्ता के नल और आरओ लगाए, जो टिकाऊ नहीं हैं और अक्सर खराब हो जाते हैं, जिससे पेयजलापूर्ति ठप पड़ जाती है।
राय के अनुसार, आरओ से निकलने वाला पानी भी अस्पताल मानकों के अनुरूप शुद्ध नहीं है, क्योंकि उसमें घुले ठोस पदार्थों की मात्रा अधिक पाई जा रही है।
विधायक तक पहुंच रही हैं रोज शिकायतें
सरयू राय ने कहा कि पिछले पंद्रह दिनों से मरीजों और उनके परिजन लगातार फोन कर पानी की कमी की शिकायत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर शिकायत अस्पताल अधीक्षक को भेजने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था अब तक अधूरी
राय ने बताया कि उद्घाटन के समय आश्वासन दिया गया था कि एक वर्ष के भीतर सतह जल से आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी उस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी है।
अनुश्रवण समिति को मिले व्यापक अधिकार
विधायक ने कहा कि गठित होने वाली समिति को सिर्फ पानी और जनसुविधाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उसे दवाओं की उपलब्धता, मशीनों की कार्य स्थिति, पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या, पैथोलॉजी व जांच सेवाओं की गुणवत्ता पर भी नजर रखनी चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति एमजीएम अस्पताल को कानूनी मानकों के अनुरूप चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।









