जे.आर.डी. टाटा: जिन्होंने एक संगठित और सतत भविष्य की परिकल्पना की

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Jamshedpur : भारत के औद्योगिक इतिहास में यदि कोई नाम नेतृत्व, नैतिकता और संवेदनशीलता के समुच्चय के रूप में उभरता है, तो वह है—जहांगीर रतनजी दादाभॉय टाटा। जे.आर.डी. टाटा, जिनकी सोच केवल मुनाफे तक सीमित नहीं थी, बल्कि एक ऐसे समाज की परिकल्पना से प्रेरित थी, जहाँ विकास, समावेश और पर्यावरण संरक्षण एकसाथ कदम से कदम मिलाकर चलें।

उनके नेतृत्व में टाटा समूह केवल एक औद्योगिक साम्राज्य नहीं बना, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को आत्मसात करने वाली संस्था में तब्दील हो गया। आज की कॉर्पोरेट दुनिया में जिसे “वन” दृष्टिकोण कहा जाता है—वह टाटा के डीएनए में जे.आर.डी. के ज़माने से मौजूद था।

सत्तर के दशक में जब पर्यावरणीय मुद्दे बहस का विषय भी नहीं बने थे, तब उन्होंने टाटा एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट (TERI) की नींव रखी। सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) और National Institute of Advanced Studies जैसी संस्थाएं उनके दृष्टिकोण की साक्षी हैं।

जे.आर.डी. का नेतृत्व ‘बोर्डरूम’ तक सीमित नहीं था। वे कर्मचारियों के बीच जाकर संवाद करते, उनकी बात सुनते और समस्याओं का समाधान तत्परता से करते। उनका यह व्यवहार केवल संवेदनशील नहीं, बल्कि व्यावहारिक था—जो आज भी टाटा समूह की कार्यशैली का आधार है।

1932 में टाटा एयरलाइंस की स्थापना उनके दूरदर्शी सोच का प्रतीक बनी, जिसने भारतीय विमानन के भविष्य की नींव रखी। उन्होंने कभी भी डिग्रियों को योग्यता का अंतिम मानक नहीं माना और पदोन्नति जैसे फैसलों में प्रतिभा और कर्मठता को प्राथमिकता दी।

संस्कृति के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। एनसीपीए (नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स) जैसे संस्थानों के माध्यम से उन्होंने भारतीय कला और संस्कृति को नई ऊंचाई दी।

जे.आर.डी. टाटा के कार्यकाल में टाटा सन्स ने 14 कंपनियों से बढ़कर 95 कंपनियों तक विस्तार किया और समूह की संपत्ति 100 मिलियन डॉलर से 5 बिलियन डॉलर तक पहुँच गई। लेकिन उनकी सबसे बड़ी पूंजी वे मूल्य रहे, जिन्हें उन्होंने टाटा की नींव में स्थापित किया—सत्यनिष्ठा, करुणा और दीर्घदृष्टि।

आज जब दुनिया “सस्टेनेबिलिटी” की बात कर रही है, जे.आर.डी. टाटा पहले ही उस राह पर न केवल चल चुके हैं, बल्कि रास्ता भी बना चुके हैं। उनके विचार और आचरण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

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