झारखंड आंदोलनकारी कपूर बागी को श्रद्धांजलि: डिमना डैम विस्थापितों ने अधूरे सपनों को पूरा करने का लिया संकल्

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जमशेदपुर : डिमना डैम से विस्थापित हुए ग्रामीणों ने आज लायलोम ग्राम सभा भवन में झारखंड के वरिष्ठ जन आंदोलनकारी और समाजसेवी स्वर्गीय कपूर बागी की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। यह कार्यक्रम बोड़ाम प्रखंड के विभिन्न गांवों के विस्थापितों, जन प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं युवाओं की उपस्थिति में भावनात्मक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ।

झारखंड आंदोलन के एक नायक की याद में भावभीनी श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत दिवंगत नेता के चित्र पर माल्यार्पण और दो मिनट के मौन के साथ की गई। इसके पश्चात वक्ताओं ने कपूर बागी के जीवन, उनके संघर्षों और योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। ग्राम प्रधान ने अपने संबोधन में कहा:

“कपूर बागी न केवल एक आंदोलनकारी थे, बल्कि वे विस्थापितों की आवाज़ को सत्ता के गलियारों तक पहुँचाने वाले जन नेता थे।”

उन्होंने बताया कि झारखंड मुक्ति वाहिनी के बैनर तले कपूर बागी ने डिमना डैम से विस्थापित हुए हजारों परिवारों की समस्याओं को उजागर किया। टाटा कंपनी और सरकार के सामने जनसंघर्ष का नेतृत्व कर उन्हें वार्ता की मेज तक लाने में उनकी अहम भूमिका रही।

“जल, जंगल, जमीन” की लड़ाई के अमिट योद्धा

सभा में उपस्थित कई वक्ताओं ने भावुक होते हुए बताया कि कपूर बागी ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए अनेक संघर्ष किए। तीन दिन तक चले जल सत्याग्रह में भी वे डटे रहे और पीड़ितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। उनका जीवन, उनके विचार और उनके मूल्य आज भी हजारों विस्थापितों को संघर्ष की प्रेरणा दे रहे हैं।

सत्ता से दूर, जमीन से जुड़ा नेतृत्व

कपूर बागी का जीवन इस बात का प्रमाण था कि सच्चा नेतृत्व सत्ता या पद का मोहताज नहीं होता। वे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री के भाई थे, फिर भी उन्होंने एक साधारण कार्यकर्ता की तरह जन-आंदोलनों में भाग लिया। उन्होंने न कभी पद की लालसा रखी, न ही सत्ता का लाभ उठाया।

जन चेतना को जगाने वाला नारा

सभा में कपूर बागी का प्रसिद्ध नारा भी गूंजा—

“सच कहना अगर बगावत है, तो समझो हम भी बागी हैं!”

यह नारा आज भी जन आंदोलनों की आत्मा बना हुआ है। वक्ताओं ने कहा कि यह नारा न केवल प्रतिरोध का प्रतीक है, बल्कि जनता की चेतना को जागृत करने का एक सशक्त माध्यम भी है।

अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित ग्रामीणों, युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कपूर बागी के अधूरे सपनों को साकार करने की शपथ ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिमना डैम विस्थापन से जुड़े पुनर्वास, मुआवजा और अधिकारों की लड़ाई को वे तब तक जारी रखेंगे, जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता।सभा का समापन “झारखंड आंदोलन के शहीदों अमर रहें” और “जल-जंगल-जमीन बचाओ” जैसे नारों के साथ हुआ।