ओडिशा के अथागढ़ संयंत्र में कॉमफिट एनरसैव और यंत्र हार्वेस्ट के साथ साझेदारी में शुरू होगी पहल
जमशेदपुर , 30 मई 2025: ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है टाटा स्टील की नई पहल। कंपनी भारत के फेरोक्रोम उद्योग में पहली बार वेस्ट हीट रिकवरी (WHR) परियोजना को लागू करने जा रही है। यह परियोजना ओडिशा के कटक जिले के अथागढ़ स्थित फेरो एलॉय संयंत्र में शुरू होगी।इस ऐतिहासिक परियोजना के क्रियान्वयन के लिए टाटा स्टील ने कॉमफिट एनरसैव प्राइवेट लिमिटेड और यंत्र हार्वेस्ट के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये दोनों कंपनियां हीट और एनर्जी रिकवरी समाधानों के क्षेत्र में अग्रणी मानी जाती हैं।

ऊर्जा संरक्षण और लागत में बड़ी बचत की उम्मीद
यह नवाचारी परियोजना फर्नेस स्मेल्टिंग प्रक्रिया से निकलने वाली वेस्ट गैस से गर्मी को संग्रहित कर उसका पुनः उपयोग करने पर केंद्रित है। इस प्रक्रिया से उत्पादित गर्मी का इस्तेमाल क्रोम ओर फाइन्स को सुखाने में किया जाएगा, जिससे अब तक आवश्यक फर्नेस ऑयल की खपत समाप्त हो जाएगी।इससे न केवल CO₂ उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी, बल्कि सालाना ₹3 करोड़ तक की ऊर्जा लागत में बचत भी होगी।
प्रदर्शन आधारित बिल्ड-ओन-ऑपरेट मॉडल
परियोजना को एनर्जी सेविंग्स कंपनीज़ (ESCO) मॉडल के तहत Build-Own-Operate (BOO) फ्रेमवर्क में लागू किया जाएगा। इसमें परियोजना की पूंजी लागत उस हीट एनर्जी से रिकवर की जाएगी, जिसे पहले वातावरण में व्यर्थ छोड़ दिया जाता था। यह एक पारदर्शी, दक्ष और प्रदर्शन-आधारित भुगतान व्यवस्था को सुनिश्चित करता है।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ समझौता
समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख अधिकारियों में शामिल थे:
- पंकज सतीजा, एक्जीक्यूटिव इंचार्ज – FAMD, टाटा स्टील
- गणेश भट, तकनीकी निदेशक – कॉमफिट एनरसैव
- गौरांग भट्ट, तकनीकी निदेशक – यंत्र हार्वेस्ट
समारोह में टाटा स्टील के अन्य वरिष्ठ अधिकारी –
बी.डी. नन्दा (चीफ, ऑपरेशंस – फेरो एलॉयज प्लांट्स),
नताशा झा (हेड, प्रोजेक्ट्स, टेक्नोलॉजी और इम्प्रूवमेंट),
सरबेस्वर नायक (हेड, फेरो एलॉयज प्लांट, अथागढ़)
और साझेदार कंपनियों के जितेंद्र जैन (एमडी, कॉमफिट एनरसैव) एवं आलोक झा (रीजनल सेल्स मैनेजर, यंत्र हार्वेस्ट) उपस्थित रहे।
सतत विकास की दिशा में सशक्त कदम
इस अवसर पर टाटा स्टील के कार्यकारी अधिकारी पंकज सतीजा ने कहा:
“ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के बीच गहरे संबंध को समझते हुए हम उस ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं, जो अब तक वातावरण में व्यर्थ जाती थी। यह साझेदारी CO₂ उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा दक्षता में वृद्धि और लागत में बचत का मार्ग प्रशस्त करेगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना टाटा स्टील के सतत औद्योगिक संचालन और जलवायु जिम्मेदारी की प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।

यह परियोजना क्यों है महत्वपूर्ण?
- भारत की फेरोक्रोम इंडस्ट्री में पहली WHR परियोजना
- पर्यावरणीय लागत में कटौती और हरित ऊर्जा की दिशा में अग्रसरता
- 3 करोड़ रुपए की सालाना बचत की संभावना
- BOO मॉडल से प्रदर्शन आधारित लाभ प्रणाली










